Teejan Bai Death : तीजन बाई के निधन पर पीएम मोदी ने जताया शोक, बोले- कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति
देश की सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी को विश्वभर में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका निधन भारतीय कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
नई दिल्ली। देश की सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी को विश्वभर में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका निधन भारतीय कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर शोक संदेश साझा करते हुए लिखा, "सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोककला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला और संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।"
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी तीजन बाई के निधन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अपनी सशक्त गायकी से लोककलाओं के क्षेत्र में अमिट पहचान बनाने वाली तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने शोक संतप्त परिवार और उनके प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
गौरतलब है कि तीजन बाई पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं। 70 वर्ष की आयु में उन्होंने रायपुर स्थित एम्स में अंतिम सांस ली। साल 1956 में छत्तीसगढ़ के भिलाई के निकट गनियारी गांव में जन्मीं तीजन बाई ने पंडवानी लोककला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। पंडवानी महाभारत की कथाओं पर आधारित एक पारंपरिक लोकगायन शैली है, जिसमें गायन और अभिनय के माध्यम से कथाओं का जीवंत मंचन किया जाता है।
भारतीय लोककला के संरक्षण और संवर्धन में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया।
तीजन बाई को मिले प्रमुख सम्मान
- जन्म: वर्ष 1956, गनियारी गांव (भिलाई, छत्तीसगढ़)
- लोककला: पंडवानी गायन
- 1988: पद्मश्री से सम्मानित
- 2003: पद्म भूषण से सम्मानित
- 2019: पद्म विभूषण से सम्मानित
- अन्य सम्मान: संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान
- निधन: 70 वर्ष की आयु में रायपुर एम्स में हुआ
