Balrampur News : सरकारी केंद्रों पर खाद का संकट, निजी दुकानों से महंगे दाम पर खरीदने को मजबूर किसान
बलरामपुर के उतरौला क्षेत्र में खरीफ फसल की बुआई के दौरान खाद की कमी से किसान परेशान हैं। सरकारी केंद्रों पर खाद नहीं मिलने के कारण किसान निजी दुकानों से महंगे दाम पर खाद खरीदने को मजबूर हैं।
उतरौला/बलरामपुर, अमृत विचार। मानसून सक्रिय होने के साथ खरीफ फसलों की बुआई शुरू हो गई है, लेकिन बलरामपुर जिले के उतरौला क्षेत्र में किसानों के सामने खाद की किल्लत बड़ी समस्या बन गई है। सरकारी खाद केंद्रों पर पर्याप्त स्टॉक न होने के कारण किसान घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ लौट रहे हैं। मजबूरी में उन्हें निजी दुकानों से अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ रही है। उतरौला, श्रीदत्तगंज, गैड़ास बुजुर्ग और रेहरा बाजार विकासखंड के कई गांवों के किसानों का कहना है कि समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने से खेती की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं।
लाइन में लगने के बाद भी नहीं मिल रही खाद
किसान परशुराम ने बताया कि बुआई के मौसम में हर साल खाद की यही समस्या सामने आती है। घंटों इंतजार के बाद स्टॉक खत्म होने की बात कहकर किसानों को वापस भेज दिया जाता है, जबकि बाद में कुछ लोगों को खाद उपलब्ध करा दी जाती है। किसान रिजवान ने खाद वितरण में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा कि कार्ड व्यवस्था होने के बावजूद कई किसानों को समय पर सूचना नहीं मिलती, जिससे वे खाद लेने से वंचित रह जाते हैं।
'प्रभावशाली लोगों को आसानी से मिल जाती है खाद'
बुजुर्ग किसान कासिम का आरोप है कि सामान्य किसान लाइन में खड़े रहते हैं, जबकि प्रभावशाली लोगों को बिना परेशानी कई बोरी खाद उपलब्ध करा दी जाती है। वहीं किसान राजिंदर, आसिफ, बहराइची और बब्बू ने बताया कि सरकारी केंद्रों पर खाद नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी दुकानों से करीब 600 रुपये प्रति बोरी की दर से खाद खरीदनी पड़ रही है। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।
किसानों ने प्रशासन से की कार्रवाई की मांग
किसानों ने प्रशासन से सरकारी केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने, वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर खाद नहीं मिली तो खरीफ फसलों की बुआई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
