बरेली: सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की भूमि की जांच से मेयर और अफसरों में बढ़ी रार

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की भूमि को लेकर मेयर डा. उमेश गौतम ने अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नोडल अधिकारी नवनीत सहगल को पत्र देकर बताया है कि नगर आयुक्त अभिषेक आनंद की जांच रिपोर्ट झूठ का पुलिंदा है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की निविदा के गोलमाल की शिकायत पर पुराने मामलों …

अमृत विचार, बरेली। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की भूमि को लेकर मेयर डा. उमेश गौतम ने अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नोडल अधिकारी नवनीत सहगल को पत्र देकर बताया है कि नगर आयुक्त अभिषेक आनंद की जांच रिपोर्ट झूठ का पुलिंदा है।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की निविदा के गोलमाल की शिकायत पर पुराने मामलों को तूल देने का कार्य किया जा रहा है। कुछ अधिकारी सपा नेताओं से मिलकर राजनीतिक द्वेषवश उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। भूमि की जो रिपोर्ट मंडलायुक्त को दी गई है उसमें खामियां हैं और पहले की जांच से काफी अंतर है।

नगर आयुक्त जांच रिपोर्ट देने के बाद अचानक लंबी छुट्टी पर चले गए हैं लेकिन नगर निगम का माहौल इन दिनों गर्मा गया है। मंगलवार को मेयर के तेवर कुछ अधिकारियों के प्रति कड़े रहे। उन्होंने नोडल अधिकारी को सर्किट हाउस पहुंचकर सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की भूमि और इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी की भूमि के बारे में विस्तार से बताया है।

कई पत्र दिखाकर मेयर ने नगर आयुक्त की रिपोर्ट को गलत ठहराया है। नगर आयुक्त की चार बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट का सच उजागर करने का दावा करते हुए कहा है कि वर्ष 2006 में नगर निगम की भूमि पर अतिक्रमण का मामला प्रकाश में आया था। इसके बाद टीम ने थाना बिथरी पुलिस के सहयोग से कब्जे को हटवा दिया था।

इससे संबंधित पुलिस की रिपोर्ट मेयर ने नोडल अधिकारी को दिखाई है। टीम ने तत्कालीन नगर आयुक्त के आदेश पर इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी, महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय के कब्जे की भूमि को मुक्त करा दिया था। इसके बाद अब नये सिरे से जांच करवाकर इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी की चहारदीवारी को सॉलिड वेस्ट की भूमि पर दर्शाया जाना कुछ अफसरों की गहरी चाल है जबकि हकीकत तो यह है कि इससे संबंधित जांच रिपोर्ट शासन को जा चुकी है। पहले की जांच में और अब की जांच रिपोर्ट में अंतर है। पूरे मामले को सुर्खियों में लाने के पीछे गहरी चाल है।

उच्चस्तरीय जांच की मांग
मेयर डा. उमेश गौतम ने नोडल अधिकारी से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समय पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के बरेली आगमन पर और 1 नवम्बर को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की शिकायत करने के कारण पुराने मामले में घेराबंदी की जा रही है। नगर आयुक्त की रिपोर्ट तथ्यों से परे है। उन्होंने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की भूमि से जुड़े कागजात और खुद किए गये बैनामे के कागजात की छाया प्रति दी है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर धन की बंदरबाट करने का विरोध उनके स्तर से किया गया। प्रोजेक्ट की निविदा चहेती कंपनियों को दी गई है।

एक अधिकारी मेरे ऊपर दबाव बनाने को कर रहे साजिश : मेयर
मेयर डा. उमेश गौतम ने कहा कि 2019 में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की भूमि की एक बार जांच हुई थी। इसमें निगम की भूमि पर इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी का अवैध कब्जा नहीं दर्शाया गया है। एक अधिकारी दबाव बनाने के लिए साजिश रच रहे हैं। नगर आयुक्त की गलत रिपोर्ट को आधार बनाकर हमें परेशान किया जा रहा है पर हम किसी को लूटने की खुली छूट नहीं देंगे।

56 दिन बाद जांच रिपोर्ट उजागर
नोडल अधिकारी के आने के पहले एक अफसर ने जांच रिपोर्ट को उजागर किया है ताकि नोडल अधिकारी नवनीत सहगल के सामने मामला जोर-शोर से उठाया जा सके। नगर आयुक्त की चार बिंदुओं की जांच रिपोर्ट 2 नवम्बर की है। करीब 54 दिन बाद मामले को तूल दिया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि जांच रिपोर्ट को साजिश के तहत उजागर किया गया है।

नगर आयुक्त की जांच या मेयर की चिठ्ठी में है दम
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की भूमि पर अवैध कब्जा साबित कर कार्रवाई कराने की मंशा रखने वाले सक्रिय हो गए हैं। नगर आयुक्त की जांच रिपोर्ट को शासन तक पहुंचाने के लिए प्रकिया शुरू कर दी गई है जबकि दूसरी ओर मेयर को घेरने के लिए विपक्षियों को मौका हाथ लग गया है। विभिन्न माध्यमों और कुछ संगठन के लोग नगर निगम की भूमि को खाली कराने के लिए सक्रिय हो गए हैं। अब देखने वाली बात यह है कि आने वाले समय में शासन का रुख क्या होता है। मेयर की बात में दम है या नगर आयुक्त की जांच रिपोर्ट में, क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे को गलत साबित करने में जुटे हैं।

एक बार फिर बढ़ी नगर आयुक्त से दूरी
मेयर डा. उमेश गौतम का कार्यकाल 6 जनवरी को तीन साल का हो जाएगा। यह दूसरी बार स्थिति उत्पन्न हुई है कि नगर आयुक्त से रार बढ़ी है। इससे पहले के नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन के कार्यकाल में भी मेयर से कुछ दिनों तक रिश्ते अच्छे रहे लेकिन बाद में एक-दूसरे के विरोधी हो गए। यहां तक कि उनके चैंबर में हुई घटना के बाद पार्षदों पर मुकदमा दर्ज हो गया था। करीब एक साल के समय में कई दूरियां बढ़ीं और कई प्रोजेक्ट को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे। अब नगर आयुक्त अभिषेक आनंद का जनवरी के पहले सप्ताह में एक साल का कार्यकाल हो जाएगा लेकिन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की भूमि की जांच को लेकर मेयर ने मोर्चा खोल दिया है। अब देखना यह है कि अवकाश से वापस लौटने के बाद इसका असर नगर निगम की कार्यशैली पर क्या पड़ता है।

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