बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है... 

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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रक्षाबंधन का त्योहार आते ही वातावरण में अपने आप मिठास घुल जाती है। सावन की फुहारों के बीच रंग-बिरंगी राखियों से सजे बाजार, मिठाइयों की खुशबू और घरों में होने वाली तैयारियां मन को उत्साह से भर देती हैं, लेकिन इस त्योहार की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसके साथ बचपन की कितनी ही यादें लौट आती हैं। बहन की कलाई में बंधी राखी, भाई की कलाई पर सजा रक्षासूत्र, उपहार को लेकर होने वाली नोकझोंक और फिर साथ बैठकर मिठाई खाना-सब कुछ जैसे किसी पुराने फिल्मी दृश्य की तरह आंखों के सामने तैरने लगता है, जब इन यादों के साथ कोई पुराना फिल्मी गीत कानों में पड़ जाए, तो रक्षाबंधन का रंग और गहरा हो जाता है। हिंदी सिनेमा ने भाई-बहन के रिश्ते को सिर्फ कहानियों में ही नहीं, बल्कि ऐसे गीतों में भी पिरोया है, जो दशकों बाद आज भी त्योहार का हिस्सा बने हुए हैं।

‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना’
 
राखी का सबसे भावुक गीत

रक्षाबंधन के गीतों की बात हो और ‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना’ का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। 1959 की फिल्म ‘छोटी बहन’ का यह गीत लता मंगेशकर की आवाज, शंकर-जयकिशन के संगीत और शैलेंद्र के शब्दों से सजा है। गीत में बहन की मासूम उम्मीद और भाई के प्रति उसका स्नेह बेहद सहज ढंग से सामने आता है। इस गीत की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 67 साल बाद भी रक्षाबंधन आते ही यह गीत रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुनाई देने लगता है।

‘फूलों का तारों का’ : भाई-बहन के रिश्ते की चंचल मिठास

फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ का ‘फूलों का तारों का, सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है’ रक्षाबंधन के मौके पर बजने वाला एक और सदाबहार गीत है। किशोर कुमार की आवाज में यह गीत भाई के अपनी बहन के प्रति प्रेम को बेहद खूबसूरत अंदाज में व्यक्त करता है। गीत की खासियत यह है कि इसमें रिश्ते की गंभीरता के साथ बचपन जैसी शरारत और अपनापन भी महसूस होता है। आज भी भाई अपनी बहन के लिए यह गीत सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और शुभकामना संदेशों में इस्तेमाल करते हैं।

‘मेरे भैया मेरे चंदा’ : बहन के स्नेह की कोमल अभिव्यक्ति

1965 की फिल्म ‘काजल’ का ‘मेरे भैया मेरे चंदा’ भी भाई-बहन के रिश्ते पर फिल्माए गए यादगार गीतों में शामिल है। आशा भोसले की आवाज में यह गीत बहन के मन में भाई के लिए मौजूद स्नेह और गर्व को सामने लाता है। रक्षाबंधन की भावनाओं को गीतात्मक रूप देने वाले लोकप्रिय गीतों में इसका नाम आज भी लिया जाता है।

‘बहना ने भाई की कलाई से’ : राखी के धागे की कहानी

1974 में आई ‘रेशम की डोरी’ का गीत ‘बहना ने भाई की कलाई से’ रक्षाबंधन के पारंपरिक भाव को सीधे गीत में उतार देता है। धर्मेंद्र और सायरा बानो अभिनीत इस फिल्म का यह गीत राखी के धागे को भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक बनाता है। सुमन कल्याणपुर की आवाज ने इसे विशेष भावुकता दी।

‘ये राखी बंधन है ऐसा’ : रिश्ते की मजबूती का गीत

फिल्म ‘बेईमान’ का ‘ये राखी बंधन है ऐसा’ भी उन गीतों में है, जिनके बिना रक्षाबंधन की फिल्मी प्लेलिस्ट अधूरी लगती है। लता मंगेशकर और मुकेश की आवाज में यह गीत भाई-बहन के रिश्ते की स्थायी मजबूती को रेखांकित करता है।

‘रंग बिरंगी राखी लेकर आई बहना’ 

1962 की फिल्म ‘अनपढ़’ का ‘रंग बिरंगी राखी लेकर आई बहना’ रक्षाबंधन की खुशियों को अपने नाम की तरह ही रंगीन बना देता है। लता मंगेशकर की आवाज और मदन मोहन का संगीत इस गीत को त्योहार की पारंपरिक खुशी से जोड़ते हैं।

‘राखी’ से ‘परख’ तक : फिल्मों में बसा राखी का संसार

रक्षाबंधन पर आधारित या इस त्योहार को केंद्र में रखने वाले गीतों की सूची काफी लंबी है। ‘राखी’ फिल्म का ‘राखी धागों का’, ‘परख’ का ‘कहते हैं राखी के धागे’, ‘अनजाना’ का ‘हम बहनों को लिए’ और ‘फरिश्ते’ का ‘भाई बहन का प्यार’ जैसे गीत भी भाई-बहन के रिश्ते को अलग-अलग भावों में सामने लाते हैं। यानी हिंदी सिनेमा में राखी सिर्फ एक त्योहार नहीं रही, बल्कि कभी खुशी, कभी विरह, कभी जिम्मेदारी और कभी बचपन की यादों का प्रतीक बनकर पर्दे पर आती रही है।

नई फिल्मों में बदला भाई-बहन का अंदाज

समय के साथ फिल्मों में भाई-बहन के रिश्ते को दिखाने का अंदाज भी बदला है। अब कहानियां सिर्फ भाई के रक्षक होने और बहन के स्नेह तक सीमित नहीं हैं। भाई-बहन एक-दूसरे के दोस्त, हमराज और मुश्किल समय में सहारा बनने वाले किरदारों के रूप में दिखाई देते हैं। 2022 की फिल्म ‘रक्षा बंधन’ का ‘धागों से बांधा’ इसी बदलती संवेदना का उदाहरण है। यह गीत पारंपरिक राखी के धागे को आधुनिक भावनाओं के साथ जोड़ता है और बताता है कि समय बदल सकता है, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता आज भी उतनी ही मजबूत है।

रिश्तों को महसूस करने का अवसर

रक्षाबंधन इसलिए भी खास है कि यह सिर्फ कलाई पर धागा बांधने का पर्व नहीं, बल्कि रिश्तों को फिर से महसूस करने का अवसर है। इस मौके पर कहीं से ‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना’ या ‘फूलों का तारों का’ की धुन सुनाई देती है, तो लगता है जैसे समय कुछ पल के लिए ठहर गया हो। पुराने घर, बचपन की शरारतें, भाई-बहन की नोकझोंक और परिवार के साथ बिताए वे दिन—सब कुछ एक साथ लौट आता है। शायद इसी वजह से रक्षाबंधन आते ही कुछ गीत मन में खुद-ब-खुद गुनगुनाने लगते हैं और पूरा माहौल यादों, रिश्तों और खुशियों से भर उठता है।

 

 

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