कानपुर नगर निगम में ‘टेंडर माफिया’ पर बड़ा एक्शन! एसआईटी जांच शुरू, दो ठेकेदार गिरफ्तार, 7 फर्म ब्लैकलिस्ट; सरगना गोविंद राजस्थान में ट्रेस

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कानपुर नगर निगम के टेंडर सिंडिकेट और फर्म रजिस्ट्रेशन में कथित फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने छह एफआईआर दर्ज कर सात फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया है। दो ठेकेदार गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि कथित सरगना गोविंद शर्मा की लोकेशन राजस्थान में मिली है। मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है।

कानपुर, अमृत विचार। नगर निगम में टेंडर माफिया सिंडिकेट व फर्म रजिस्ट्रेशन में फर्जीवाड़े की शिकायत पर कमिश्नरेट पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। नगर निगम में माफिया राज पर मुख्यमंत्री के कड़े तेवर के बाद नगरनिगम में टेंडर सिंडिकेट मामले में कुल छह मुकदमें दर्ज किए गए हैं। स्वरूपनगर में पांच, फजलगंज एक एफआईआर हुई। सात फर्म ब्लैकलिस्ट की गईं। एसआईटी भी गठित की गई है। सिंडिकेट में शामिल दो ठेकेदार संदीप जैन व रज्जन बाजपेई को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। 

वहीं, फरार सिंडिकेट सरगना गोविंद शर्मा की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगी हैं। गोविंद की लोकेशन राजस्थान में मिली है। आरोपियों पर धोखाधड़ी , डराने धमकाने, रंगदारी वसूलने की धाराओं में कार्रवाई की गई है। नगर निगम जांच करने पहुंची एसआईटी टीम, प्रभारी एडीसीपी डॉ. अर्चना सिंह के नेतृत्व में चीफ इंजिनियर ऑफिस में टीम कर रही जांच, भुगतान और फर्म रजिस्ट्रेशन से जुड़ी फाइलों की जाँच कर रहीं, मुख्य अभियंता एसएफए जैदी, अधिशाषी अभियंता दिवाकर भास्कर, आरके सिंह समेत कई नगर निगम अफसरों से पूछताछ जारी है।

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने मंगलवार को कार्रवाई के संबंध में की प्रेसवार्ता में बताया कि सात फर्म संचालकों के खिलाफ छह मुकदमें दर्ज हुए हैं। जल्द सातवीं एफआईआर भी होगी। पांच मुकदमे नगर आयुक्त की तहरीर पर स्वरूपनगर थाने में दर्ज किए गए, जबकि एक मुकदमा ठेकेदार शनि सिंह की तहरीर पर फजलगंज में दर्ज हुआ है। जिसमें ठेकेदार ने डरा धमकाकर जबरन टेंडर वापस लेने की बात कही गई है। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि फर्म संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी, डराने धमकाने, रंगदारी वसूलने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। 

उन्होंने बताया कि ब्लैकलिस्ट फर्म संचालकों के जीएसटी टिन नंबरों, बैंक खातों, साथ में काम करने वाले, संपत्ति आदि की जांच कराई जा रही है। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ठेकेदारों के और कितनी फर्में रजिस्टर्ड हैं, टेंडर प्रक्रिया में किसकी मिलीभगत है। सिंडिकेट कैसे संचालित होता है और सरगना गोविंद किसके संरक्षण में सिंडिकेट चला रहा था आदि, इन सभी की जांच एडीसीपी सेंट्रल डॉ. अर्चना सिंह के नेतृत्व में चार सदस्यीय एसआईटी का गठन कर कराया जा रहा है। 

टीम में एसीपी स्वरूप नगर ज्योति, फजलगंज इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय, स्वरूपनगर इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह हैं। एसआईटी नगर निगम में भ्रष्टाचारों की मिली शिकायतों की जांच करेगी। जांच के आधार पर कार्रवाई होगी। दो गिरफ्तारी का पता चलते ही गोविंद मंगलवार तड़के फरार हो गया। लगातार उसकी लोकेशन ट्रेस की जा रही है। मौजूदा लोकेशन राजस्थान में मिली है। जल्द ही उसे गिरफ्तार किया जाएगा। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर की भी कार्रवाई होगी।

हुक्म चलाता था सरगना गोविंद

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि नगर निगम में एक ऐसा सिंडिकेट एक्टिव था, जो रजिस्टर्ड फर्मों को ठेके बांटने, कितनी लागत का टेंडर डाला जाएगा, किसको ठेका व किसको कितना काम मिलेगा। यह सब निर्धारित करता था। सिंडिकेट का सरगना आगरा निवासी गोविंद शर्मा है। वह छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश में पहले काम करता था। बाद में कानपुर आकर अपना जाल फैलाया। उसके सिंडिकेट में संदीप जैन, रज्जन बाजपेई शामिल थे। गोविंद ठेकेदारों को धमकाकर 15 प्रतिशत डाउन पेमेंट में टेंडर डलवाता था। सांठगांठ से उसकी सिंडिकेट वाली फर्म को ही टेंडर मिलता था।

इन फर्मों को किया गया ब्लैक लिस्ट

नगरनिगम की जांच के बाद सात फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। जिसमें दिलीप बाजपेई इंटरप्राइजेज मेसर्स, अजय एंटरप्राइजेज मेसर्स, पारसनाथ बिल्डर, केरल एंटरप्राइजेज, तिरुपति ट्रेडर्स व जगदंबा एंटरप्राइजेज समेत अन्य फर्में शामिल हैं। आरोप है कि ठेका लेने के लिए एक्सपायर दस्तावेज लगाए गए। गलत सूचनाएं दी गईं। कुछ निर्माण की गुणवत्ता कमजोर मिलने की बात जांच में सामने आई है। इन फर्मों की जांच रिपोर्ट नगर निगम ने पुलिस को सौंपी थी।

इन्हीं फर्मों को दिए गए थे करोड़ों के टेंडर

पुलिस कमिश्नर के अनुसार जांच के दायरे में आईं फर्मों को बीते वित्तीय वर्ष में भी करोड़ों के टेंडर दिए गए थे। तिरुपति ट्रेडर्स को 30 करोड़, जगदंबा एंटरप्राइजेज को 20 करोड़ व पारसनाथ फर्म को करीब 24 करोड़ के टेंडर दिए जाने का पता चला है। इन सभी कार्यों व टेंडर प्रक्रिया की जांच की जा रही है। पुलिस उन सभी फर्मों और उनके दस्तावेजों, मिले टेंडरों की जांच कर रही है, जो कथित सिंडिकेट से जुड़े बताए जा रहे हैं।

टेंडर से हटने की धमकी, 10 लाख रंगदारी मांगी

 नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने पर एक फर्म संचालक ने तीन ठेकेदारों को जान की धमकी दी और 10 लाख रंगदारी मांगी। पीड़ित के अनुसार दबाव में आकर वह एक लाख दे भी चुका है। नौ लाख की व्यवस्था न होने पर उसने मुख्य अभियंता को पत्र देकर निविदा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की। मामले में फजलगंज में मुकदमा दर्ज कराया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार उसकी फर्म एस एंड बी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवेलपर्स का नगर निगम में चालू वित्तीय वर्ष के लिए एचएमपी श्रेणी में पंजीकरण हुआ था।

इसके बाद फर्म ने नगर निगम की आमंत्रित निविदा में प्रतिभाग किया। आरोप है कि ठेकेदार गोविन्द शर्मा, संदीप जैन व रज्जन बाजपेई ने टेंडर वापस लेने का दबाव बनाया। आरोप है कि 20 जुलाई की रात फजलगंज में आरोपियों धमकाते हुए 10 लाख रुपये मांगे। उससे कहा गया कि तिरुपति इंटरप्राइजेज व जगदंबा इंटरप्राइजेज को ही काम मिलना चाहिए, इसलिए उसकी फर्म किसी निविदा में प्रतिभाग नहीं करेगी। इसके बाद उसे धमकी दी। पीड़ित ने पुलिस से जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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