Gonda News: तालाब की जमीन बेचने पर 8 के खिलाफ FIR, सभासद की शिकायत पर कोर्ट ने लिया संज्ञान
गोंडा, अमृत विचार। शहर में स्थित सरकारी तालाब की जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेचने का मामला सामने आया है। न्यायालय के आदेश पर नगर कोतवाली पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला मेवातियान क्षेत्र की करीब 0.33 हेक्टेयर तालाब भूमि से जुड़ा है।
न्यू मेवातियान कॉलोनी निवासी और क्षेत्रीय सभासद आफताब की ओर से न्यायालय में दिए गए प्रार्थना-पत्र में आरोप लगाया गया था कि गाटा संख्या 868, रकबा 0.33 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है। शिकायत के मुताबिक इसका पुराना गाटा नंबर 2298 है और सरकारी अभिलेखों में भी भूमि का स्वरूप जलमग्न/तालाब दर्ज है।
आरोप है कि अब्दुल गफ्फार, रफीक और सत्तार, पुत्रगण गुरगुल्ला निवासी मेवातियान ने कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर तालाब की जमीन को गाटा संख्या 2298 दर्शाते हुए 8 अप्रैल 2026 को एजाज अहमद और उनकी पत्नी तहरीन हक के पक्ष में बैनामा कर दिया। शिकायत में धानेपुर थाना क्षेत्र के दिनेश कुमार पुत्र तुंगनाथ निवासी धुसवा अम्ब्रीश कुमार तिवारी पुत्र राजेंद्र तथा दूधनाथ पर भी साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बैनामे के बाद तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नामजद लोगों का एक गिरोह शहर की बेशकीमती जमीनों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें खरीदने-बेचने का काम करता है। इसके जरिए आर्थिक और भौतिक लाभ अर्जित किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
सभासद के मुताबिक उन्होंने पहले नगर कोतवाली में मामले की सूचना देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को स्वयं मिलकर और रजिस्टर्ड डाक से शिकायत दी गई। इसके बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली थी। कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए नगर कोतवाली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। नगर कोतवाल विन्देश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया कि अब कोर्ट के आदेश पर नगर कोतवाली में सभी आठ आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
जांच में यह स्पष्ट होगा कि तालाब की जमीन के अभिलेखों में किस स्तर पर हेरफेर की गई और कथित बैनामे में किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद सरकारी तालाब की जमीन को लेकर हुए इस कथित फर्जीवाड़े ने राजस्व और भूमि अभिलेखों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
