Moradabad News : 5 सितंबर को रखा जाएगा जन्माष्टमी का व्रत, जानें रोहिणी नक्षत्र और पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त
रोहिणी नक्षत्र चार को रात 12 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर पांच रात 11 बजकर चार मिनट तक रहेगा।
मुरादाबाद में 5 सितंबर को जन्माष्टमी का व्रत रखा जाएगा। रात 11:57 से 12:43 बजे तक निशिता पूजा और अभिषेक का सबसे शुभ मुहूर्त रहेगा।
मुरादाबाद, अमृत विचार। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में अर्द्धरात्रि के समय रोहिणी नक्षत्र वृष राशि में हुआ था, इसलिए इस पर्व की पूजा भी आधी रात को की जाती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी चार सितंबर शुक्रवार को मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि चार सितंबर को सुबह दो बजकर 25 मिनट से शुरू होगी और 4-5 सितंबर को रात 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी। वहीं, रोहिणी नक्षत्र चार सितंबर को रात 12 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर पांच सितंबर रात 11 बजकर चार मिनट तक रहेगा।
कृष्ण जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिर्विद् पं. सुरेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए मध्यरात्रि का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पांच सितंबर की रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु पांच सितंबर की सुबह पारण कर सकते हैं।
विशेष बात यह है कि इस दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृष लेकिन जन्म के समय रोहिणी नक्षत्र नहीं रहेंगे। क्योंकि रोहिणी नक्षत्र रात्रि 11:04 तक रहेगा और भगवान श्री कृष्ण का जन्म मध्य रात्रि 12:00 बजे हुआ है।
कृष्ण जन्माष्टमी । चार सितंबर चौघड़िया मुहूर्त
चर योग: सुबह 6:00 से 7:35 बजे तक
लाभ बेला: सुबह 7:35 से 9:10 बजे तक
अमृत: सुबह 9:10 से 10:45 बजे तक
शुभयोग: दोपहर 12:20 से 1:55 बजे तक
चर याेग: शाम 5:05 से 6:39 बजे तक
लाभ बेला: रात 9:30 से 10:55 बजे तक
निशिता पूजा का शुभ समय
रात्रि 11:57 बजे से 12:43 बजे तक (4/5 सितंबर )
पूजा अवधि: 46 मिनट
इसी समय लड्डू गोपाल का अभिषेक, झूला उत्सव, आरती और जन्मोत्सव मनाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतार की स्मृति में मनाया जाता है। यह कथा मुख्य रूप से श्रीमद्भागवत महापुराण, हरिवंश पुराण और विष्णु पुराण में वर्णित है।
भगवान श्रीकृष्ण ने उस समय पृथ्वी पर अवतार लिया, जब अधर्म, अन्याय और अत्याचार अपने चरम पर थे। उनका जन्म केवल एक राजा के रूप में नहीं, बल्कि धर्म की पुनः स्थापना और भक्तों की रक्षा के लिए हुआ था। -ज्योतिर्विद् पं. सुरेंद्र कुमार शर्मा श्री हरि ज्योतिष संस्थान
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