आत्मनिर्भरता का पहला कदम
नौकरी का पहला दिन जिंदगी के उन दिनों में शामिल होता है, जिसे इंसान चाहकर भी भूल नहीं पाता। मेरे लिए भी वह दिन कुछ ऐसा ही था। प्रथमा बैंक (अब उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक) में बतौर क्लर्क मेरी पहली नौकरी थी और उस दिन मन में उत्साह के साथ-साथ एक अनजाना डर भी था। मन बार-बार यही सोच रहा था कि न जाने बैंक का माहौल कैसा होगा, अधिकारी कैसे होंगे और मैं अपने काम को ठीक से कर पाऊंगा या नहीं।
सुबह मैं रोज की अपेक्षा कुछ जल्दी तैयार हो गया था। कपड़े पहनते समय भी मन में एक अलग ही खुशी थी। यह सिर्फ नौकरी का पहला दिन नहीं था, बल्कि मेरे लिए अपने पैरों पर खड़े होने की शुरुआत थी। घर से निकलते समय परिवार के लोगों ने शुभकामनाएं दीं। उनके चेहरे पर मेरे लिए गर्व साफ दिखाई दे रहा था। मैं भी मन ही मन ईश्वर को याद करते हुए बैंक के लिए निकल पड़ा।
जब बैंक की शाखा में पहुंचा, तो कुछ क्षणों के लिए दरवाजे पर ही ठिठक गया। भीतर कर्मचारियों की व्यस्तता देखकर समझ में आ गया कि बैंक में हर मिनट कितना महत्वपूर्ण होता है। कहीं ग्राहक पासबुक अपडेट कराने के लिए खड़े थे, तो कोई पैसे जमा करने या निकालने के लिए काउंटर पर अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। अधिकारी अपने-अपने काम में व्यस्त थे।
मैंने संकोच के साथ शाखा प्रबंधक से मुलाकात की। उन्होंने मुस्कुराकर मेरा स्वागत किया और मेरा परिचय बाकी कर्मचारियों से कराया। वरिष्ठ साथियों ने भी बहुत सहजता से मेरा स्वागत किया। उनकी आत्मीयता से मेरे मन की झिझक कुछ कम हुई।
इसके बाद मुझे मेरे काम के बारे में समझाया गया। बैंकिंग के नियम-कायदे किताबों में पढ़े थे, लेकिन उन्हें सामने बैठकर काम में इस्तेमाल करना बिल्कुल अलग अनुभव था। शुरुआत में छोटी-छोटी बातों को लेकर भी मैं सावधान रहता था। किसी दस्तावेज को देखते हुए कई बार वरिष्ठ कर्मचारी से पुष्टि कर लेता। मुझे डर रहता था कि कहीं मेरी छोटी-सी गलती किसी ग्राहक के लिए परेशानी न बन जाए। दोपहर तक बैंक का माहौल मेरे लिए काफी परिचित-सा लगने लगा था। ग्राहकों से बातचीत करते हुए आत्मविश्वास भी बढ़ने लगा। दिन कब बीत गया, पता ही नहीं चला। शाम को जब बैंक बंद होने के बाद मैं बाहर निकला तो मन में एक अजीब-सी संतुष्टि थी।
घर लौटते समय मैंने पीछे मुड़कर बैंक की इमारत को देखा। सुबह जिस जगह को लेकर मन में इतनी घबराहट थी, शाम होते-होते वही जगह मेरी अपनी कार्यस्थली लगने लगी थी। नौकरी करते हुए मुझे 15 साल हो गए। वर्तमान में मैं बतौर शाखा प्रबंधक कार्यरत हूं ,लेकिन बैंक में वह पहला दिन मेरे लिए केवल नौकरी की शुरुआत नहीं था, बल्कि जिम्मेदारियों, सीखने और आत्मनिर्भर बनने की एक नई यात्रा का पहला कदम था। आज भी उस दिन को याद करता हूं, तो चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
मोहित गुप्ता/शाखा प्रबंधक, यूपीजीबी, शाहजहांपुर
