हल्द्वानी: शहर में खुलेआम बिक रहे ग्रे और सेनेगल पैरेट सहित कई प्रतिबंधित पक्षी

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Edited By Amrit Vichar
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भूपेश कन्नौजिया, हल्द्वानी। शहर के मुख्य चौराहों पर बेचने के लिए पिंजरे में कैद पक्षी आसानी से देखने को मिल जाते हैं, लेकिन इन बहेलियों की ओर संबंधित महकमे के आला अधिकारियों का ध्यान कभी नहीं जाता। संबंधित विभाग की लापरवाही का नतीजा है कि खुलेआम प्रतिबंधित पक्षियों की बिक्री की जा रही है। वहीं …

भूपेश कन्नौजिया, हल्द्वानी। शहर के मुख्य चौराहों पर बेचने के लिए पिंजरे में कैद पक्षी आसानी से देखने को मिल जाते हैं, लेकिन इन बहेलियों की ओर संबंधित महकमे के आला अधिकारियों का ध्यान कभी नहीं जाता। संबंधित विभाग की लापरवाही का नतीजा है कि खुलेआम प्रतिबंधित पक्षियों की बिक्री की जा रही है। वहीं अमृत विचार ने जब इस मामले की पड़ताल की तो इससे जुड़ीं तमाम अन्य खामियां सामने आईं।

विभाग की तरफ से पक्षी बेचने का जिन लोगों को लाइसेंस आवंटित किया गया है वह करीब दस साल पुराना है। पूछने पर बहेलियों ने जवाब दिया कि एक बार पंजीकरण के बाद दोबारा इसे रिन्यू करवाने का कोई प्रावधान नहीं है। यही नहीं हल्द्वानी, रुद्रपुर, फतेहपुर, कालाढूंगी क्षेत्र में ऐसे ही पिंजरों में कैद पक्षियों को बेचने वाले बहेलियों के पास न तो लाइसेंस है और न ही विभाग से प्राप्त कोई अन्य अनुमति प्रपत्र। हल्द्वानी के समीपवर्ती फतेहपुर और सिंधी चौराहे के पास जब एक बहेलिया का लाइसेंस देखा गया तो एक ही लाइसेंस की फोटो कॉपी पर दो लोग पक्षी बेचते नजर आए।

पक्षी खरीदने, बेचने और ब्रीडिंग के लिए जरूरी है पंजीकरण
हल्द्वानी। देशी-विदेशी पशु पक्षी पालने के शौकीन लोगों को पक्षियों का रजिस्ट्रेशन वाइल्ड लाइफ विभाग में कराना जरूरी होता है। सरकार द्वारा 31 मार्च तक विदेशी पक्षियों का रजिस्ट्रेशन (सेल्फ वालंटियरी डेक्लेरेशन) देना होगा अन्यथा वाइल्ड लाइफ विभाग ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा। कई लोगों को जंगली जीव खासकर महंगे विदेशी तोते व अन्य पक्षी पालने का शौक होता है जिनकी कीमत दो लाख तक होती है। इनमें मकाऊ पैरेट, ग्रे पैरेट, सेनेगल पैरेट तथा बडग्रीजर प्रमुख हैं। भारत सरकार के फॉरेस्ट, एन्वायरमेंट तथा क्लाइमेट चेंज मंत्रालय के जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक ऐसे पक्षियों और जंगली जीवों को पालने वालों को इनका रजिस्ट्रेशन वाइल्ड लाइफ विभाग में कराना जरूरी है। इसमें कितने पक्षी पाल रखे हैं तथा उनकी वैरायटी क्या है, इसकी डिटेल देनी होगी। मकसद विदेशी पक्षियों की तस्करी रोकने के साथ फना एंड फ्लोरा के तहत निगरानी रखना भी है। रजिस्ट्रेशन के बाद किसी पक्षी के मरने पर या नए पक्षी पैदा होने पर उसकी जानकारी विभाग को अपडेट करानी होगी। विभाग के परिवेश पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक है।

वैसे तो परिवेश पोर्टल पर 15 दिसंबर तक रजिस्ट्रेशन कराना था, लेकिन अब यह तारीख 31 मार्च तक बढ़ा दी गई है, जो रजिस्ट्रेशन नहीं करेगा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कुछ लोगों ने इंपोर्टेड पक्षियों का रजिस्ट्रेशन कराया भी है। तोतों सहित अन्य प्रतिबंधित पक्षियों की तस्करी में लगाम कसे जाने के लिए टीम काम कर रही है। लाइसेंस प्रक्रिया को लेकर लगातार विभागीय कर्मचारी मानीटरिंग करते हैं, इन मामलों को लेकर सरकार का रुख भी सख्त है अगर जांच में काई दोषी पाया जाता है और अवैध तरीके से पक्षियों को खरीदता बेचता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

– जेएस सुहाग, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन

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