हल्द्वानी: राजस्थान और झारखंड से जुड़े साइबर अपराधियों के तार
गौरव पांडेय, हल्द्वानी। राजस्थान और झारखंड में बैठे साइबर अपराधियों के गिरोहों ने उत्तराखंड में ठगी और धोखाधड़ी का जाल बिछाया है। ये गिरोह रोजाना दर्जनों वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। साइबर अपराध के नियंत्रण में जुटी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को जांच-पड़ताल के दौरान इन राज्यों में गिरोहों के तार जुड़े मिले हैं। …
गौरव पांडेय, हल्द्वानी। राजस्थान और झारखंड में बैठे साइबर अपराधियों के गिरोहों ने उत्तराखंड में ठगी और धोखाधड़ी का जाल बिछाया है। ये गिरोह रोजाना दर्जनों वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। साइबर अपराध के नियंत्रण में जुटी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को जांच-पड़ताल के दौरान इन राज्यों में गिरोहों के तार जुड़े मिले हैं। साइबर अपराधियों की धरपकड़ के लिए एसटीएफ की अलग-अलग टीम ने इन राज्यों में डेरा डाल दिया है। साइबर अपराधियों की लोकेशन भेदकर उन्हें गिरफ्तार करने की रणनीति पर काम चल रहा है।
साइबर अपराधियों की धरपकड़ के लिए कुमाऊं और गढ़वाल से तेज-तर्रार 20 सदस्यीय पुलिस टीम को राजस्थान और झारखंड भेजा गया है। दरअसल, उत्तराखंड पुलिस को इन राज्यों से संचालित साइबर अपराधियों के गिरोह के पुख्ता सबूत मिले हैं। ये साइबर अपराधी अपने मुफीद ठिकानों में बैठकर राज्य के लोगों को निशाना बना रहे हैं। आलम यह है कि राज्य में साइबर अपराध की बाढ़ सी आ गई है। कुमाऊं और गढ़वाल में जिला स्तर पर सक्रिय साइबर सेल के पास रोजाना 100 से अधिक शिकायतें आ रही हैं। साइबर अपराधी अलग-अलग तौर-तरीके अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं। लेकिन अब ये साइबर अपराधी राज्य की एसटीएफ के सीधे रडार पर आ चुके हैं। पुलिस टीम इन राज्यों में पहुंचकर मिली लोकेशन के आधार पर साइबर अपराधियों की धरपकड़ के लिए अपना जाल बिछा रही है। सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो एसटीएफ अगले कुछ दिनों में इन राज्यों से साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी कर सकती है।
खासतौर पर चार जिले साइबर अपराधियों के निशाने पर
हल्द्वानी। उत्तराखंड में खासतौर पर चार बड़े जिले साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं। कुमाऊं में ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जबकि गढ़वाल में देहरादून और हरिद्वार में बड़े पैमाने पर साइबर अपराध सामने आए हैं। इसके अलावा कोई भी जिला साइबर अपराध से बचा नहीं है। बीते तीन सालों में साइबर अपराध के मामलों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस के मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में साइबर अपराध के 211 मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2019 में 244 जबकि वर्ष 2020 में यह आंकड़ा बढ़कर 325 पहुंच चुका है। यहां यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि पुलिस थानों में आने वाली सभी शिकायतें दर्ज नहीं की जाती। वास्तविक आंकड़े इससे कई गुना अधिक हैं। राज्य की भौगोलिकी का महज 40 फीसदी क्षेत्र ही नियमित पुलिस के हवाले है। दुरुस्थ और दुर्गम क्षेत्रों की शिकायतें पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाती।
हेल्पलाइन पर महज दो दिन में 30 शिकायतें आई
हल्द्वानी। गृह मंत्रालय ने राज्य में साइबर अपराध पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने के लिए 17 जून को हेल्पलाइन नंबर 155260 जारी किया था। हेल्पलाइन नंबर की शुरुआत से लेकर अब तक महज दो दिनों के भीतर ही ठगी और धोखाधड़ी की 30 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। यह आलम तब है जब अभी तक राज्य की बड़ी आबादी को हेल्पलाइन नंबर की पूरी जानकारी तक नहीं है। इसके अलावा देहरादून और रुद्रपुर के साइबर थानों के साथ ही जिला स्तर पर सक्रिय साइबर सेल में अलग से शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।
साइबर अपराधियों से निपटने के लिए फोर्स रणनीतिबद्ध रूप से काम कर रही है। पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने के साथ ही साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के प्रयास चल रहे हैं। साइबर अपराधियों की तलाश में फोर्स को राजस्थान और झारखंड भेजा गया है। जल्द ही साइबर अपराधी जेल की सलाखों में होंगे।
– वी मुरुगेशन, आईजी, एसटीएफ
