देहरादून: त्रिवेंद्र के पत्र से दिल्ली तक खलबली, लेकिन सभी चुप

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देहरादून, अमृत विचार। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लेटर बम से बुधवार को हड़कंप मच गया। प्रत्याशियों की सूची तय होने से ऐन पहले पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखे पत्र में विधानसभा चुनाव न लड़ने की इच्छा जताई है। वर्तमान में त्रिवेंद्र देहरादून जिले की डोईवाला सीट से विधायक …

देहरादून, अमृत विचार। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लेटर बम से बुधवार को हड़कंप मच गया। प्रत्याशियों की सूची तय होने से ऐन पहले पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखे पत्र में विधानसभा चुनाव न लड़ने की इच्छा जताई है। वर्तमान में त्रिवेंद्र देहरादून जिले की डोईवाला सीट से विधायक हैं। त्रिवेंद्र के इस कदम से राज्य की राजनीति में एक भूचाल सा आ गया। हालांकि, भाजपा की ओर से अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को अपने हस्तलिखित पत्र में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके मुख्यमंत्री रहते हुए जो सहयोग किया है। उसके लिए वह आभारी हैं। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है और युवा नेतृत्व पुष्कर धामी के रूप में मिला है। बदली राजनीतिक परिस्थितियों में मुझे विधानसभा चुनाव 2022 नहीं लड़ना चाहिए, मैं अपनी भावनाओं से आपको पूर्व में ही अवगत करा चुका हूं। मैं भाजपा का कार्यकर्ता हूं। राष्ट्रीय सचिव, झारखंड प्रभारी, उत्तर प्रदेश लोकसभा चुनाव 2014 में मैंने सहप्रभारी की जिम्मेदारी निभाई है। मैंने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली समेत कई चुनाव अभियानों में काम किया है। उन्होंने कहा कि वह संगठन के लिए काम करना चाहते हैं।

फैसले बदले जाने से असहज थे त्रिवेंद्र
देहरादून। भाजपा सरकार के इस कार्यकाल में करीब चार साल तक मुख्यमंत्री रहने वाले त्रिवेंद्र सिंह रावत के चुनाव लड़ने पर काफी समय से चर्चाएं तेज थी। रावत डोईवाला सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां से वह तीन बार 2002, 2007 और 2017 का चुनाव जीते, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व के सामने रावत को इस बार टिकट दिए जाने को लेकर असमंजस है, क्योंकि उन्हें बीच कार्यकाल में ही मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था। यही नहीं, रावत के कई फैसले धामी और तीरथ सिंह सरकार में बदले भी गए थे। असहज त्रिवेंद्र कई बार अपनी पीड़ा को मीडिया के सामने रख चुके थे।

टिकट पर मंडरा रहे थे संशय के बादल
देहरादून। बताया जा रहा है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत को इस बार भाजपा टिकट देती या नहीं, इस पर संशय के बादल मंडरा रहे थे। चर्चा यह भी है कि इस बार सरकार विरोधी लहर को काबू में करने के लिए भाजपा अपने दस से ज्यादा विधायकों के टिकट काटने वाली हैं। त्रिवेंद्र का टिकट भी इसी दायरे में था। त्रिवेंद्र ने इसको भांपकर पहले ही चुनाव न लड़ने की इच्छा जाहिर कर दी।

हरक से रहा हमेशा 36 का आंकड़ा
देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का भाजपा से निष्कासित हरक सिंह रावत से हमेशा 36 का आंकड़ा रहा। त्रिवेंद्र ने मुख्यमंत्री रहते हुए श्रम कर्मकार बोर्ड के अध्यक्ष पद से हरक को विदा कर दिया था। हरक ने इसकी शिकायत आलाकमान तक से की थी। पिछले दिनों जब हरक को पार्टी से निकाला गया तो त्रिवेंद्र ने हरक के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी।

 

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