हल्द्वानी: पेंशन की आस में गई जान, सालों बाद अब लौटी मुस्कान

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के पूर्व अधिकारियों की उदासीनता का खामियाजा भुगत रहीं थी वीर नारियां और पूर्व सैनिकों का परिवार

हल्द्वानी, अमृत विचार। जवानी देश के नाम कर दी, लेकिन जब बारी इन जवानों और इनके परिवार को कुछ देने की आई तो सिस्टम खामियों की दुहाई देने लगा। कभी वीर नारियां तो कभी उनके परिजन जिला सैनिक कल्याण बोर्ड में अपनी एंडियां घिसते रहे। कुछ तो पेंशन की आस लिए ही चल बसे और ये सब हुआ पूर्व अधिकारियों की उदासीनता के चलते, लेकिन अब चेहरों पर खुशी लौट रही है। सालों बाद खोया धन अब उम्मीदों की झोली भरने लगा है। 

मदन लाल चौधरी एसीएमटी बटालियन में सिपाही के पद पर तैनात थे। 25 जून 2019 को उनकी मृत्यु हो गई और मृत्यु के बाद नियमत: पेंशन उनकी पत्नी पार्वती देवी को मिलनी चाहिए थी, लेकिन नहीं मिली। जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के पूर्व अधिकारियों ने व्यक्तिगत तौर पर रुचि नहीं ली और प्रिंसिपल कंट्रोलर ऑफ डिफेंस एकाउंट्स (पीसीडीए) ने हर बार कागज वापस भेज दिए।

इधर, पार्वती के बड़े बेटे जयप्रकाश की मृत्यु हो गई। वह अवसाद में चली गईं और पेंशन की आस के साथ ही वर्ष 2022 में उनकी मृत्यु हो गई। पार्वती अपनी भतीजी हाईडिल काठगोदाम निवासी सरोज बाला के बेहद करीब थीं। सरोज का कहना है कि वह पति की पेंशन के लिए काफी लालायित थीं और ये लालसा लिए ही वह चल बसीं।

तब से वह बकाया पेंशन के लिए जी जान से जुटीं थी और इस बीच उनकी मुलाकात तीन दिन पहले जिला सैनिक कल्याण बोर्ड अधिकारी सुबोध शुक्ल और उप जिला सैनिक कल्याण बोर्ड अधिकारी पुष्कर सिंह भंडारी से हुई। दोनों ने व्यक्तिगत रुचि ली और जो काम चार साल से लटका था, उन्होंने दो दिन में करा दिया। जल्द ही पेंशन के 588880 रुपये या 645473 रुपये मदन के बच्चों के खाते में होंगे।  


न मां रहीं, न पिता, बेटी को दिलाई पेंशन

उप जिला सैनिक कल्याण बोर्ड अधिकारी पुष्कर सिंह भंडारी ने एक बेटी गीता अधिकारी को उसका दिलाया। गीता के पिता राम सिंह नौसेना में थे। पहले गीता की बीमार माता की मृत्यु हुई। फिर पिता के देखभाल की जिम्मेदारी भी गीता पर आ गई और 29 अक्टूबर 2021 को उनकी भी मृत्यु हो गई। गीता के पास आय के साधन समाप्त हो गए। गीता ने हर स्तर पर प्रयास किए, लेकिन बात नहीं बनी। फिर पुष्कर सिंह भंडारी ने इस काम को अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प लिया और अब गीता के नाम पर 1 जुलाई 2022 को पीपीओ जारी कर बेसिक 24811 प्राप्त हो गया है।


5 साल भटक रहे गौरव सेनानी का काम 3 दिन में हुआ

गौरव सेनानी सूबेदार दीवान सिंह साहब भारतीय सेना में वर्ष 1955 में भर्ती और वर्ष 1983 में सेवानिवृत्त हुए। पिछले 5 सालों से अपनी धर्मपत्नी के नाम तथा जन्म तिथि का सही प्रकार से नामांकन ना होने से परेशान थे। वयोवृद्ध गौरव सेनानी दीवान सिंह थक हार कर पुष्कर सिंह भंडारी से मिले। तत्पश्चात 3 दिन के भीतर समस्या का निदान हो गया। 

 

 

संबंधित समाचार