Kanpur: सुहागिनों ने रखा वट सावित्री का व्रत, की विधि-विधान से पूजा, पति की लंबी आयु का मांगा वरदान

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कानपुर, अमृत विचार। गुरुवार को प्रातः काल से ही महिलाओं ने सज-धज कर पूजन सामग्री व पकवान आदि लेकर अखंड सौभाग्य के प्रतीक वट वृक्ष की पूजा अर्चना करके पति की लंबी आयु की कामना की व परिक्रमा लगाई। ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को बट सावित्री व्रत पूजन करने का विधान है। 

सावित्री वट व्रत 2

पति की लंबी आयु के लिए महिलाएं बरगदाही का व्रत अखंड सौभाग्यवती होने के लिए आदिकाल से करती चली आ रही हैं। क्षेत्र के गांव में जहां पर बट वृक्ष हैं, वहां पर साफ-सफाई होने के बाद महिलाएं सज-धज कर सुबह से ही अपने हाथ से पकवान बनाकर फूल अक्षत सिंदूर गंगाजल लेकर बट वृक्ष का पूजन करने पहुंची। विधि-विधान से पूजा अर्चना करने के बाद बट वृक्ष की पूजा करके परिक्रमा लगाई।

पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार बट सावित्री व्रत तब से चला आ रहा है, जब सावित्री ने यह जानते हुए भी कि उनके होने वाले पति की उम्र कम है। फिर भी उन्होंने सत्यवान से विवाह किया। मृत्यु का दिन निकट आने के पहले ही सावित्री निर्जला व्रत धारण करके अपने पति के साथ रहीं। जंगल में थीं। यमराज सत्यवान के प्राण लेने के लिए आते हैं। उस समय सावित्री अपने पति के साथ वटवृक्ष के नीचे बैठी थी। 

तमाम अनुनय विनय करने के बाद आखिर में यमराज को सत्यवान के प्राण लौटने पड़े व सावित्री को अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद देकर प्रस्थान कर गए। तभी से बट वृक्ष की पूजा सावित्री व्रत के नाम से होती चली आ रही है, जिसमें महिलाएं बढ़-कर कर अब भी लग्न के साथ निर्जला व्रत रखकर वट वृक्ष का पूजन करने के बाद ही व्रत का पालन करती हैं।

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