राम मंदिर चढ़ावा विवाद : SIT ने सरकार को सौंपी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट, मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी
लखनऊ: अयोध्या में राम मंदिर दान के वित्तीय प्रबंधन में कथित हेराफेरी की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक प्रतिवेदन रिपोर्ट सौंप दी है। जांच दल का नेतृत्व कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी।
जांच पूरी तरह गोपनीय, बताने के लिए अधिकृत नहीं
विजय विश्वास पंतएसआईटी के अध्यक्ष और लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने पत्रकारों को बताया, "आज हमने शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी की जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) को सौंपी है। यह एक प्रारंभिक प्रतिवेदन है और उसी क्रम में आज इसे अपर मुख्य सचिव को सौंप दिया गया है।"
जब पत्रकारों ने उनसे कथित गबन से जुड़े सवाल पूछे, तो उन्होंने जवाब में कहा कि यह एक पूरी तरह से गोपनीय जांच है और इसके तथ्यों को उजागर करने के लिए हम इस समय अधिकृत नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो हमारी जांच थी, वह हमने शासन को उपलब्ध करा दी है।
13 जून को हुआ था तीन सदस्यीय SIT का गठन
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और दान राशि से संबंधित आरोपों की जांच के लिए 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। अधिकारियों ने बताया था कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह एसआईटी गठित की गई। यह दल तीर्थ क्षेत्र में दानपात्रों के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों की जांच कर सरकार को अपनी रिपोर्ट देगा।
इस एसआईटी में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी तथा लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी व पुलिस महानिरीक्षक किरन एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।
ट्रस्ट ने की थी निष्पक्ष जांच की मांग
अयोध्या स्थित तीर्थ क्षेत्र में दानपात्रों को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को गंभीरता से लेते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल गठित किए जाने का अनुरोध किया था। ट्रस्ट के अनुसार, अफवाहों पर रोक लगाने और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए इसकी गहन जांच आवश्यक है। ट्रस्ट का मानना है कि यह तीर्थ क्षेत्र की छवि और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचाने की गहरी साजिश है, जिसका पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है।
अखिलेश यादव ने उठाया था मामला
इस पूरे मामले की शुरुआत 7 जून को हुई थी, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कुछ तथ्यों का हवाला देते हुए मंदिर के दान में गबन का मामला उठाया था और इसमें न्यायिक संज्ञान लेने की अपील की थी।
सीएम योगी ने कहा था- 'दूध का दूध और पानी का पानी होगा'
इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में अपनी अयोध्या यात्रा के दौरान यह दावा किया था कि इस जांच में एसआईटी 'दूध का दूध और पानी का पानी' करेगी। उन्होंने राम भक्तों को आश्वस्त करते हुए कहा था कि जब पांच सौ वर्षों तक इंतजार किया है, तो 15 दिन और इंतजार करके देख लो।
