Ram Mandir Trust Meeting : पहले से तैयार थी बैठक की स्क्रिप्ट, ! बस सदस्यों की मोहर लगानी थी बाकी
तय समय से 25 मिनट देर से शुरू हुई बैठक
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को हुई अहम बैठक में सब कुछ पहले से तैयार था। सूत्रों के अनुसार बैठक की स्क्रिप्ट दिल्ली से मिले मार्गदर्शन के आधार पर पहले ही तैयार कर ली गई थी।
अयोध्या, अमृत विचार : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को हुई अहम बैठक में सब कुछ पहले से तैयार था। सूत्रों के अनुसार बैठक की स्क्रिप्ट दिल्ली से मिले मार्गदर्शन के आधार पर पहले ही तैयार कर ली गई थी। सदस्यों को बस अपनी मोहर लगानी थी। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की पृष्ठभूमि में बुलाई गई इस बैठक में इस्तीफों, एसआईटी रिपोर्ट और भविष्य की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन अंदरूनी जानकारी बताती है कि फैसले लगभग तय थे। बताया जा रहा कि प्रेस विज्ञप्ति भी पूर्व से ही तैयार थी।
राम मंदिर में ट्रस्ट की बैठक तय समय अपराह्न तीन बजे से करीब 25 मिनट की देरी से शुरू हुई। राम मंदिर परिसर में आयोजित हुई। अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुल 14 सदस्यों में से 9 सदस्य मौजूद रहे। महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर चर्चा हुई। दोनों ने चढ़ावा चोरी मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था।
बैठक में इन इस्तीफों को स्वीकार कर लिया गया। बैठक में एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट पर संक्षिप्त चर्चा हुई, जिसमें दान-पात्रों से प्राप्त राशि की गणना और कथित गड़बड़ी की जांच शामिल थी। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अनऑडिटेड आय-व्यय, बैलेंस शीट और अन्य वित्तीय ब्यौरे को भी मंजूरी दी गई। मंदिर प्रबंधन की भविष्य की व्यवस्था और सीईओ नियुक्ति जैसे मुद्दों पर भी फैसला लिया गया।
बैठक से पहले अध्यक्ष ने जारी किया पत्र, चंदा चोरी पर जताया दुख
ट्रस्ट की बैठक से कुछ घंटे पहले अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने एक पत्र के माध्यम से अपना बयान जारी किया। लिखा कि राम मंदिर में हुई दान चोरी से मैं बहुत आहत हूं। जिसने भी यह पाप किया है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। मुझे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूर्ण विश्वास है कि वो हर व्यक्ति जो भी इस पाप से जुड़ा हुआ है, वह उसको सजा दिलाएंगे। लिखा कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रश्न है, मेरा निवेदन है कि इसमें किसी भी व्यक्ति को अपने निजी लाभ के लिए राजनीति नहीं करती चाहिए।
