खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच भड़का पश्चिम एशिया, अमेरिकी एक्शन से बौखलाए ईरान ने दी 'निर्णायक जवाब' की चेतावनी

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Published By Anjali Singh
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दुबई। पश्चिम एशिया में एक बार फिर व्यापक सैन्य संघर्ष की आशंका गहरा गई है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में बुधवार तड़के ईरान के खिलाफ भीषण "जवाबी हवाई हमले" किए। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर में कच्चा तेल बेचने की अनुमति देने वाले विशेष लाइसेंस को भी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद ईरान ने जवाबी रुख अपनाते हुए बहरीन और कुवैत पर मिसाइल हमले किए, जिसके बाद दोनों खाड़ी देशों ने बुधवार सुबह अपने यहां हवाई रक्षा प्रणालियों को सक्रिय कर हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

अमेरिका की बड़ी सैन्य और आर्थिक चोट

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी बयान के अनुसार, अमेरिकी बलों ने ७ जुलाई को ईरान के खिलाफ आक्रामक हमलों का एक नया दौर पूरा किया। वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों की "भारी कीमत वसूलने" के लिए सटीक हथियारों से ईरान के 80 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणालियों, रडार, तटीय निगरानी तंत्र, जमीन से हवा और जहाज-रोधी मिसाइल ठिकानों को तबाह किया गया। इसमें ईरानी अर्द्धसैनिक 'इलामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली 60 से अधिक छोटी नौकाओं को भी नष्ट कर दिया गया, जो जलमार्ग में जहाजों को परेशान करने में मुख्य भूमिका निभाती थीं।

एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई १० दिन पहले किए गए हमलों की तुलना में ४ से ५ गुना अधिक शक्तिशाली थी। ईरान के सरकारी मीडिया ने भी बंदर अब्बास, केशम और सिरिक में भीषण धमाकों की पुष्टि की है। सैन्य हमले के साथ ही अमेरिका ने अंतरिम समझौते के तहत ईरान को खुले बाजार में तेल बेचने के लिए दिया गया लाइसेंस रद्द कर दिया है। इस लाइसेंस के जरिए ईरान को वर्षों बाद वैध रूप से तेल बेचने की अनुमति मिली थी। ईरान पर लंबे समय से चोरी-छिपे चीन को कम दाम पर प्रतिबंधित तेल बेचने का संदेह रहा है।

किन जहाजों को बनाया गया था निशाना?

यूएस सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी कि ईरान ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक पोतों को निशाना बनाया था।

मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला यह कतरी पोत ओमान मार्ग से गुजर रहा था, तभी इस पर हमला हुआ और इसमें आग लग गई।

सऊदी अरब के झंडे वाला टैंकर

लाइबेरिया के झंडे वाला वाणिज्यिक जहाज

यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, अन्य दो जहाजों को आंशिक नुकसान पहुंचा है, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ और वे अपने मार्ग पर आगे बढ़ गए।


खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच भड़का आक्रोश

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम चल रहे हैं। खामेनेई २८ फरवरी को युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजराइल के हमलों में मारे गए थे। माना जा रहा था कि शोक की इस अवधि के दौरान तनाव कम रहेगा, लेकिन तेहरान में उमड़ी भीड़ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की "हत्या का आह्वान" किया। हालांकि, बुधवार को जब ये हमले हुए, तब राष्ट्रपति ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन के लिए तुर्किये में मौजूद थे।

समझौते पर मंडराया संकट, ईरान ने दी चेतावनी

इस ताजा सैन्य टकराव से युद्ध रोकने के लिए हुए अंतरिम समझौते के पूरी तरह टूटने का खतरा पैदा हो गया है। खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने के लिए अंतिम दौर की वार्ता शुरू होनी थी। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे समझौता ज्ञापन के पैराग्राफ एक और दो का गंभीर उल्लंघन बताया है। ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान ने इसे "आतंकवादी कृत्य" करार देते हुए 'निर्णायक जवाब' देने की चेतावनी दी है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने 'एक्स' पर लिखा, "धौंस और उगाही का दौर खत्म हो चुका है। इससे कोई नतीजा नहीं निकलेगा। हम झुकते नहीं हैं।"

बहरीन और कुवैत में सायरन और अलर्ट

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने उन खाड़ी देशों को निशाना बनाया जहां अमेरिकी सेना की मौजूदगी है। बहरीन, जो अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (5th Fleet) का मुख्यालय है, वहां बुधवार तड़के मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले सायरन गूंज उठे। वहीं कुवैत की सेना ने भी बयान जारी कर कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियां संभावित ईरानी मिसाइल हमलों को हवा में ही रोकने में लगी हुई हैं।

जलमार्ग के नियंत्रण को लेकर विवाद

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से दुनिया का एक बड़ा तेल व्यापार गुजरता है। अंतरिम समझौते के तहत दोनों देश 60 दिनों तक जहाजों को बिना शुल्क गुजरने देने पर सहमत हुए थे। हालांकि, तेहरान इस पूरे मार्ग पर अपना नियंत्रण और भविष्य में शुल्क वसूलने की मांग कर रहा है, जिसका अमेरिका और खाड़ी के अरब देश कड़ा विरोध कर रहे हैं। ताजा हमलों ने इस पूरे क्षेत्र को एक बार फिर बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है।

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