2 करोड़ लोग, 45 देश ... ईरान में सदी का सबसे बड़ा अंतिम संस्कार, खामनेई की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
तेहरान। अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों में मारे गए ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम शनिवार से आधिकारिक रूप से शुरू हो गए हैं। गौरतलब है कि फरवरी में ईरान युद्ध की शुरुआत के दौरान हुए एक भीषण हवाई हमले में 86 वर्षीय खामेनेई की मौत हो गई थी।
'ग्रैंड मोसल्ला' में अंतिम दर्शन
दिवंगत नेता के शव को आम जनता और समर्थकों के अंतिम दर्शन के लिए देश की राजधानी तेहरान स्थित 'ग्रैंड मोसल्ला' में रखा गया है। शनिवार तड़के से ही तेहरान की सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह बंद रही। काले कपड़े पहने लाखों शोकाकुल लोग पैदल ही 'ग्रैंड मोसल्ला' की तरफ बढ़ते नजर आए।
उमड़ी शोकाकुल लोगों की भारी भीड़
शहरभर में खामेनेई की तस्वीरों वाले बड़े-बड़े होर्डिंग्स और बैनर लगाए गए हैं। सड़कों पर मौजूद पुरुषों की भारी भीड़ शिया समुदाय की पारंपरिक विदाई के तहत लयबद्ध तरीके से अपनी छाती पीटकर शोक व्यक्त कर रही है। अंतिम संस्कार में शामिल होने आईं 27 वर्षीय हनानेह मौसवी ने रोते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं "मैं अपने प्रिय नेता अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने यहां आई हूं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा दिन देखना पड़ेगा। काश, इस त्रासदी से पहले मेरी मौत हो गई होती।"
1989 के ऐतिहासिक घटनाक्रम की यादें ताजा
'ग्रैंड मोसल्ला' में अंतिम दर्शन के लिए ठीक वैसा ही एक खुला मंच तैयार किया गया है, जहां से खामेनेई कभी तेहरान के बीचों-बीच स्थित अपने परिसर 'हुसैनिया' से देश को संबोधित करते थे। यह परिसर 28 फरवरी को इजराइली हवाई हमले में पूरी तरह नष्ट हो गया था, जिसमें खामेनेई और उनके परिवार के कुछ सदस्यों की जान चली गई थी।
ईरान सरकार का अनुमान है कि इस अंतिम विदाई में राजधानी की सड़कों पर लाखों लोग उतरेंगे, जो साल 1989 में दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहुल्ला खुमैनी के अंतिम संस्कार के ऐतिहासिक दृश्य की याद दिलाता है। तबरीज़ शहर से आए एक नागरिक अली काजमी ने कहा, "हम अंतिम संस्कार में यह दिखाने के लिए शामिल हुए हैं कि हम सभी अपने देश और धर्म की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
होर्मुज जलडमरूमध्य और भू-राजनीतिक समीकरण
इस महा-आयोजन में लोगों की भारी भागीदारी ऐसे समय में ईरान सरकार का मनोबल बढ़ाने का काम कर रही है, जब वह युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर है। इस बातचीत में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपने रणनीतिक नियंत्रण का लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इस बीच इजराइल द्वारा दोबारा हमला किए जाने की आशंका भी लगातार बनी हुई है।
समय का चयन और 'अमेरिका मुर्दाबाद' के नारे
ईरान ने इस कार्यक्रम की शुरुआत के लिए 4 जुलाई का दिन चुना है, जो अमेरिका का स्थापना दिवस (250वीं वर्षगांठ) भी है। हालांकि अधिकारियों ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन तेहरान में उमड़ी भीड़ ने लगातार "अमेरिका मुर्दाबाद" के नारे लगाए, जो 1979 की इस्लामी क्रांति और अमेरिकी दूतावास बंधक संकट के बाद से वहां एक आम नारा बन चुका है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख
इसी बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साउथ डकोटा में माउंट रशमोर के सामने आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ईरान को लेकर एक बड़ा बयान दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "हमने ईरान को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है। वे समझौता करने के लिए बेहद बेचैन हैं। हमने अंतिम संस्कार के लिए उन्हें एक सप्ताह की मोहलत दी है।"
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