Badrinath Dham: बदरीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी का सनसनीखेज आरोप, BKTC अध्यक्ष ने दिए निष्पक्ष जांच के आदेश

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Published By Anjali Singh
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सोशल मीडिया पर आरोप प्रसारित होने के बाद बीकेटीसी हरकत में

देहरादून, अमृत विचार: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्री बदरीनाथ धाम में कथित तौर पर चढ़ावे व दान में हेराफेरी का आरोप सोशल मीडिया पर प्रसारित होने का मामला सामने आने पर बीकेटीसी हरकत में आ गया है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि सोशल मीडिया में श्री बदरीनाथ धाम में चढ़ावे एवं दान में कथित हेराफेरी के संबंध में जो आरोप लगाए गए हैं, उन्हें मंदिर समिति ने अत्यंत गंभीरता से लिया है।

इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं तथ्यपरक जांच के लिए जांच समिति गठित करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया गया है। जांच पूर्ण होने के बाद यदि कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया में जिस कर्मचारी को उनका ''निजी सचिव'' बताया जा रहा है, वह उनका निजी सचिव नहीं है। संबंधित कर्मी बीकेटीसी का नियमित सरकारी कर्मी है तथा वैयक्तिक सहायक के रूप में पूर्व में भी मंदिर समिति के तीन अध्यक्षों के साथ कार्य कर चुका है इसलिए सोशल मीडिया में उसके संबंध में प्रसारित किए जा रहे आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

वहीं, बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि बदरीनाथ मंदिर से संबंधित जो प्रकरण विगत 2 जुलाई की शाम से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसमें प्राप्त कथित शिकायत के आधार पर बदरीनाथ मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की शुक्रवार को जांच करायी गयी। हालांकि उपलब्ध फुटेज में अपेक्षित स्पष्टता नहीं है। संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के लिए आंतरिक जांच समिति गठित होने के बाद सभी तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों एवं संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

भ्रामक आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए

मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि यह प्रकरण उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध एवं करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्री बदरीनाथ धाम से जुड़ा है इसलिए जब तक किसी भी आरोप की विधिवत जांच के माध्यम से पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार के अपुष्ट अथवा भ्रामक आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए। सभी से अपेक्षा है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए संयम बरतें, ताकि पवित्र धाम की गरिमा एवं छवि पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

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