40 किलो से ज्यादा कूड़ा निकला तो खुद करना होगा निस्तारण : होटल-मैरिज हॉल और हाउसिंग सोसाइटियों को कानपुर नगर निगम का आदेश, नहीं माने तो जुर्माना
नगर निगम ने जारी किया किया पत्र, परिसर में लगाना होगा कम्पोस्टिंग या बायोगैस प्लांट
कानपुर नगर निगम ने 40 किलो या उससे अधिक प्रतिदिन कचरा पैदा करने वाले होटल, मैरिज हॉल, हाउसिंग सोसाइटी और संस्थानों के लिए परिसर में ही कचरा निस्तारण अनिवार्य कर दिया है। नियम उल्लंघन पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा।
कानपुर, अमृत विचार। शहर में बढ़ती कूड़ा समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने बड़ा फैसला लिया है। अब ऐसे होटल, मैरिज हॉल, हाउसिंग सोसाइटी, सरकारी और गैर-सरकारी संस्थान तथा शैक्षणिक संस्थान, जहां प्रतिदिन 40 किलो या उससे अधिक ठोस कचरा निकलता है, उन्हें अपने परिसर में ही उसके निस्तारण की व्यवस्था करनी होगी। ऐसा नहीं करने पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
नगर निगम की ओर से जारी आदेश के अनुसार, प्रतिदिन 40 किलो या उससे अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों को गीले कचरे के निस्तारण के लिए कम्पोस्टिंग यूनिट या बायोगैस प्लांट लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग करना होगा और सीपीसीबी की वेबसाइट swm.cpcb.gov.in पर पंजीकरण भी कराना होगा। यदि पंजीकरण नहीं कराया गया या परिसर में कचरा निस्तारण की व्यवस्था नहीं मिली, तो इसे नियमों का उल्लंघन मानते हुए 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
सड़कों पर बजबजा रहा कूड़ा, प्लांट में बना कचरे का पहाड़
शहर में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था पहले से ही दबाव में है। पनकी के भाऊसिंह स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट में कचरे का बड़ा ढेर जमा है। यहां आए दिन आग लगने की घटनाओं से उठने वाला धुआं आसपास के गांवों के लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। वहीं शहर की कई सड़कों पर भी कूड़ा समय से नहीं उठ पा रहा, जिससे गंदगी और दुर्गंध की समस्या बनी हुई है।
हर दिन 1200 से 1300 टन कचरा, 250 टन तक सड़क पर रह जाता है
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में रोजाना 1200 से 1300 टन कचरा निकलता है। लेकिन सफाईकर्मियों और वाहनों की कमी के चलते 200 से 250 टन कचरा प्रतिदिन सड़कों पर ही पड़ा रह जाता है। कूड़े के ढेरों पर बेसहारा पशु, कुत्ते और सुअर मंडराते रहते हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भी खतरा बना रहता है।
नगर निगम के सफाई तंत्र पर भी सवाल उठते रहे हैं। सफाईकर्मियों की लापरवाही और सुपरवाइजरों की कमजोर निगरानी के कारण कई इलाकों में समय से न तो कूड़ा उठ पाता है और न ही नियमित सफाई हो पाती है। कई होटल, मैरिज हॉल और शैक्षणिक संस्थानों का कचरा भी सड़क किनारे फेंक दिया जाता है। नगर निगम अब ऐसे संस्थानों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने की तैयारी में है।
एक नजर में स्थिति
- शहर में तैनात सफाईकर्मी: 5 हजार
- आवश्यकता: 12 हजार सफाईकर्मी
- प्रतिदिन निकलने वाला कचरा: 1200 टन
- नगर निगम को आवश्यक वाहन: 130
- वर्तमान में उपलब्ध वाहन: 65
