Kanpur News : घाटमपुर में अपना दल और BJP में खींचतान, कौन बड़ा बलवान…! 2027 चुनाव को लेकर सपा-कांग्रेस के दावेदारों ने भी बढ़ाई सक्रियता

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में घाटमपुर सीट छोड़ी थी अपना दल के लिए, फिर यहां से सरोज कुरील जीतीं

कानपुर, अमृत विचार। यह अभी तय नहीं है कि घाटमपुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार भाजपा अपना प्रत्याशी खड़ा करेगी या अपनी सहयोगी पार्टी अपना दल एस को फिर मौका देगी। फिलहाल तो इन दोनों दलों के दावेदार अपने लिए माहौल बनाने में जुटे हैं। दोनों दलों के नेताओं में खींचतान भी देखने को मिल रही है।

2022 के चुनाव में बटवारे में यह सीट भाजपा ने अपने सहयोगी अपना दल के लिए छोड़ी थी, जबकि यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि 2017 के अलावा और 2020 के उपचुनाव में यहां से भाजपा ही विजयी हुई थी। अब सवाल गूंज रहा है कि 2027 में इस सीट पर भाजपा अपना प्रत्याशी उतारेगी या फिर अपना दल को मौका देगी। इस सबके बीच इन दोनों दलों के दावेदार क्षेत्र में जनता के बीच माहौल बना रहे हैं। वर्ष 2017 में कमलरानी वरुण ने घाटमपुर सीट जीत कर पहली बार भाजपा का परचम फहराया था। 

उन्होंने बसपा की सरोज कुरील को लगभग 45 हज़ार वोट से हराया था। कांग्रेस के नंदराम सोनकर 40,465 वोट पाकर तीसरे स्थान पर थे। सरोज कुरील ने 2022 में अपना दल के टिकट पर भाजपा के सहयोग से चुनाव लड़ा और सपा के भगवती प्रसाद को हराया। खास बात यह कि भाजपा ने अपनी यह विनिंग सीट अपना दल के लिए छोड़ दी थी, जबकि 2020 के उपचुनाव में भी भाजपा के उपेंद्र पासवान कांग्रेस के कृपा शंकर से बड़े अंतर से जीते थे।

 चर्चा है कि अब 2027 में चुनाव के लिए भाजपा के स्थानीय नेता कोशिश में हैं कि यह सीट फिर पार्टी अपने खाते में शामिल कर ले और अपना दल को कहीं और समायोजित करे, लेकिन यह विजय गद्दी अपना दल आसानी से छोड़े, बेहद मुश्किल माना जा रहा है। भाजपा के ग्रामीण जिलाध्यक्ष उपेंद्र का कहना है कि फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। रिकार्ड बताता है कि 2012 में यहां से सपा के इंद्रजीत कोरी बसपा की सरोज कुरील से करीब सात सौ वोट से जीते थे, कांग्रेस के नंदराम सोनकर तीसरे और भाजपा की गीता देवी चौथे स्थान पर थीं। 

भाजपा के इन दावेदारों में मची है होड़

ग्रामीण जिला इकाई के अध्यक्ष पूर्व विधायक उपेंद्र पासवान, जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण और पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष देवेश कोरी सहित कई नेता इस सीट से भाजपा की तरफ से दावेदार हैं। उपेंद्र पासवान इसी क्षेत्र से 2020 में विधायक बने थे। चर्चा यह भी है विधायक सरोज कुरील भाजपा जॉइन कर फिर यहां से चुनाव लड़ सकती हैं, लेकिन उनका कहना है कि अब वह आजीवन अपना दल में ही रहेंगी। 

सपा और कांग्रेस में भी दावेदार कम नहीं 

सपा से सोमवती संखवार, अनिल सोनकर वारसी, मीना संखवार, सैलू सोनकर और पूर्व मंत्री इंद्रजीत कोरी दावेदार हैं। चर्चा है कि इंद्रजीत अपने पुत्र को टिकट दिलाना चाह रहे हैं। कांग्रेस से कृपा शंकर संखवार, नंदराम सोनकर, बाबू सोनकर और विकास सोनकर के नाम चर्चा में हैं।

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