Pilibhit News : डीआईओएस कार्यालय वेतन घोटाले में मुख्य आरोपी के बेटे और महिला को अग्रिम जमानत, अदालत ने लगाईं सख्त शर्तें

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Published By Deepak Mishra
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जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय से जुड़े एक करोड़ रुपये से अधिक के वेतन घोटाले में मंगलवार को जनपद एवं सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपी चपरासी इल्हाम उर्फ रहमान शम्सी के पुत्र वामीक शम्सी और दिल्ली निवासी गुलनाज फखरूद्दीन खान को अग्रिम जमानत दे दी।

पीलीभीत। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय से जुड़े एक करोड़ रुपये से अधिक के वेतन घोटाले में मंगलवार को जनपद एवं सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपी चपरासी इल्हाम उर्फ रहमान शम्सी के पुत्र वामीक शम्सी और दिल्ली निवासी गुलनाज फखरूद्दीन खान को अग्रिम जमानत दे दी। अदालत ने दोनों की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के बाद गिरफ्तारी की स्थिति में उन्हें जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए।

न्यायालय ने जमानत देते हुए कई शर्तें भी तय की हैं। आदेश के अनुसार दोनों आरोपियों को प्रत्येक नियत तिथि पर स्वयं अथवा अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित होना होगा। इसके अलावा वे किसी भी गवाह या संबंधित व्यक्ति को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित नहीं करेंगे, न्यायालय की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाएंगे और किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे।

अभियोजन के मुताबिक यह मुकदमा जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार की तहरीर पर कोतवाली पीलीभीत में दर्ज कराया गया था। आरोप है कि जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज, बीसलपुर में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इल्हाम उर्फ रहमान शम्सी ने अपनी पत्नी अर्शी खातून के साथ मिलकर धोखाधड़ी और कूटरचना के जरिए वेतन मद से सरकारी धन का गबन किया।

जांच में सामने आया कि 12 सितंबर 2024 से 98 बैंक लेनदेन के माध्यम से सरकारी खाते से कथित तौर पर 1 करोड़ 1 लाख 95 हजार 135 रुपये निकाले गए। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की, जो अभी जारी है।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि वामीक शम्सी और गुलनाज फखरूद्दीन खान का नाम न तो एफआईआर में है और न ही उनका शिक्षा विभाग या कथित घोटाले से कोई प्रत्यक्ष संबंध है। वहीं, शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि अब तक की विवेचना में दोनों के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य सामने नहीं आया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अग्रिम जमानत याचिकाएं स्वीकार कर लीं।

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