अब यूपी में होगी डेस्टिनेशन वाली शादी, नई पर्यटन नीति से जुड़ेगी ऐतिहासिक इमारत, किले, महल 

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Edited By Anjali Singh
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सीआईआई के कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने गिनाईं सरकार की तैयारियां

डेस्टिनेशन वेडिंग, ईको टूरिज्म और एआई से बढ़ेगी यूपी की पर्यटन पहचान हेरिटेज टूरिज्म की 15 इकाइयों को प्रमाणपत्र, 588 करोड़ रुपये का निवेश

लखनऊ,अमृत विचार। उप्र.अपनी ऐतिहासिक इमारतों, किलों, महलों और हवेलियों को पर्यटन और रोजगार से जोड़ने की तैयारी में है। यह जानकारी देते हुए अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरें हैं। सरकार का लक्ष्य इनके संरक्षण के साथ पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करना और निजी निवेश को प्रोत्साहित करना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा होंगे।

अपर मुख्य सचिव, मंगलवार को राजधानी स्थित निजी होटल में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के कार्यक्रम में प्रदेश में विरासत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दे रहे थे। उन्होंने कहा कि पर्यटन नीति-2022 में हेरिटेज टूरिज्म के लिए कई प्रोत्साहन दिए गए हैं। हेरिटेज सर्किट की पर्यटन इकाइयों को पूंजी निवेश पर 30 प्रतिशत तक सब्सिडी, स्टांप शुल्क में 100 प्रतिशत छूट और पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी का प्रावधान है। रोजगार सृजन पर भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

15 इकाइयों को प्रमाणपत्र, 588 करोड़ का निवेश

अमृत अभिजात ने बताया कि 1950 से पहले निर्मित पुराने किले, हवेलियां, कोठियां और महल अपनी मूल वास्तुकला को बरकरार रखते हुए हेरिटेज होटल के रूप में संचालित किए जा सकते हैं। प्रदेश में पांच हेरिटेज होमस्टे के आवेदन आए हैं, जबकि एक इकाई प्रमाणित हो चुकी है। वहीं 37 हेरिटेज होटल के आवेदन मिले हैं और 14 इकाइयां प्रमाणित हो चुकी हैं। इस तरह कुल 15 हेरिटेज पर्यटन इकाइयों को प्रमाणपत्र मिला है, जिनमें 588.21 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।

चार ऐतिहासिक संपत्तियों को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी

पर्यटन विभाग कई ऐतिहासिक संपत्तियों के नए पर्यटन उपयोग की संभावनाएं तलाश रहा है। इनमें बिठूर की बारादरी, झांसी का रघुनाथ राव पैलेस, ललितपुर का बालबेहट किला और महोबा का मस्तानी महल शामिल हैं। खासकर बुंदेलखंड के किलों और ऐतिहासिक इमारतों को पर्यटन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

पांच शहरों में डेस्टिनेशन वेडिंग पर फोकस

प्रदेश में आगरा, लखनऊ, वाराणसी, मथुरा-वृंदावन और अयोध्या को डेस्टिनेशन वेडिंग के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल देश-विदेश के पर्यटकों के साथ बड़े आयोजनों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

रामायण से सूफी सर्किट तक निवेश पर जोर

उन्होंने कहा कि ‘यूपी नहीं देखा तो इंडिया नहीं देखा’ ब्रांड के जरिए प्रदेश की पर्यटन पहचान को मजबूत किया जा रहा है। रामायण, बौद्ध, कृष्ण-ब्रज, सूफी और हेरिटेज सर्किट के साथ अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और कुशीनगर में पर्यटन निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य विरासत को संरक्षित रखते हुए उसे रोजगार, कारोबार और आर्थिक विकास का माध्यम बनाना है।

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