यूपी बनेगा डिफेंस हब: IIT कानपुर में ₹500 करोड़ से खुलेगा 'नेशनल मिलिट्री ड्रोन टेक्नोलॉजी हब', रक्षा मंत्रालय ने दी मंजूरी
मनोज त्रिपाठी, कानपुर, अमृत विचार। योगी सरकार की मजबूत पहल से उत्तर प्रदेश अब देश में सैन्य ड्रोन नवाचार का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। इस काम का इंजन आईआईटी, कानपुर बनेगा। रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए आईआईटी कानपुर में 500 करोड़ रुपये से स्थापित होने वाले नेशनल मिलेट्री ड्रोन टेक्नालॉजी केंद्र को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस केंद्र में सैन्य पेलोड, डेटा लिंक, ग्राउंड स्टेशन और काउंटर ड्रोन सिस्टम के डिजाइन, परीक्षण और प्रमाणीकरण के साथ सेना की मारक क्षमता बढ़ाने और रडार को चकमा देने वाले नैनो-मैटीरियल आधारित ड्रोन, कामीकाजी ड्रोन और अन्य अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने का काम होगा। केंद्र में स्वदेशी मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) की उन्नत तकनीक पर भी अनुसंधान किया जाएगा।
आईआईटी कानपुर में स्थापित सेंटर आफ एक्सीलेंस पहले से ही ड्रोन प्रौद्योगिकी में अनुसंधान एवं विकास, परीक्षण, प्रशिक्षण और स्टार्टअप प्रोत्साहन के लिए एकीकृत केंद्र के रूप में काम कर रहा है। अब यहां नेशनल मिलेट्री ड्रोन टेक्नालॉजी केंद्र (राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी हब) को शीघ्र मंजूरी प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नामित उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव को योगी सरकार ने पिछले माह 29 मई को रक्षा मंत्रालय के सामने रखा था, इसी के बाद मंत्रालय ने इसे सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है। माना जा रहा है कि यह केंद्र मानवरहित प्रणालियों में वैश्विक स्तर पर देश की सेनाओं को निर्णायक तकनीकी बढ़त दिलाने के साथ उत्तर प्रदेश को रक्षा ड्रोन प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। उन्नत विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास, स्टार्टअप इको सिस्टम और उच्च-कुशल रोजगार को बढ़ावा देगा।
डिफेंस कॉरिडोर नोड को मिलेगा बड़ा फायदा
आईआईटी में स्थापित होने वाला केंद्र ड्रोन के दोहरे इस्तेमाल वाले नागरिक और सैन्य मॉडल को बढ़ावा देने वाली प्रौद्योगिकी को रक्षा क्षेत्र में उपयोग के लिए विस्तारित करने के साथ विनिर्माण, रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल के लिए कानपुर, लखनऊ, आगरा, झांसी, अलीगढ़, चित्रकूट में स्थापित डिफेंस कॉरिडोर नोड में अनुसंधान, विकास और मानकीकरण की अगुवाई करेगा।
