निजी विमानन की बढ़ती उड़ान और जरूरी सुधार
वरिष्ठ पत्रकार
भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके साथ ही देश में निजी विमानन और एयर चार्टर सेवाओं की मांग भी लगातार बढ़ रही है। कुछ वर्ष पहले तक निजी विमान में यात्रा करना केवल बड़े उद्योगपतियों और चुनिंदा नेताओं तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब यह सुविधा धीरे-धीरे व्यापारियों, स्टार्टअप कंपनियों के संस्थापकों, निवेशकों, खेल और फिल्म जगत से जुड़े लोगों के बीच भी लोकप्रिय हो रही है। समय की बचत और बेहतर संपर्क की जरूरत ने इस क्षेत्र को नई गति दी है। हालांकि मांग बढ़ने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं और वित्तीय सुधारों की रफ्तार अभी उतनी तेज नहीं है।
आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। देश में नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, व्यापार का दायरा बढ़ रहा है और संपन्न लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार भारत में उच्च आय वाले लोगों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है। इसका सीधा असर निजी विमानन क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का बिजनेस एविएशन क्षेत्र हर साल लगभग 8 से 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
भारत में इस समय लगभग 250 से 300 बिजनेस जेट और बड़ी संख्या में हेलीकॉप्टर तथा चार्टर विमान सेवा में हैं। यह संख्या अमेरिका और यूरोप जैसे देशों की तुलना में कम है, लेकिन भारत में इसका विस्तार तेजी से हो रहा है। कोविड महामारी के बाद निजी उड़ानों की मांग में और अधिक वृद्धि देखी गई। उस समय लोगों ने सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा के लिए निजी विमानों का उपयोग किया। महामारी खत्म होने के बाद भी यह प्रवृत्ति बनी हुई है।
निजी विमानन की बढ़ती मांग का एक बड़ा कारण देश में हवाई संपर्क की सीमाएं हैं। भारत का भौगोलिक क्षेत्र बहुत बड़ा है और कई महत्वपूर्ण औद्योगिक तथा व्यावसायिक शहर ऐसे हैं, जहां सीधी वाणिज्यिक उड़ानें उपलब्ध नहीं हैं। कई बार एक कारोबारी को एक ही दिन में दो या तीन शहरों की यात्रा करनी होती है। ऐसी स्थिति में निजी विमान समय बचाने का सबसे आसान साधन बन जाता है।
उदाहरण के लिए, किसी छोटे औद्योगिक शहर तक पहुंचने के लिए सामान्य उड़ान और सड़क मार्ग से आठ से दस घंटे तक लग सकते हैं। वहीं निजी विमान के माध्यम से वही यात्रा कुछ घंटों में पूरी हो सकती है। यही कारण है कि बड़े कारोबारी समूह और निवेशक निजी विमानन को खर्च नहीं, बल्कि समय बचाने वाले निवेश के रूप में देखते हैं। राजनीतिक क्षेत्र में भी निजी विमानन का उपयोग तेजी से बढ़ा है। चुनावों के दौरान नेता एक दिन में कई जिलों और शहरों में सभाएं करते हैं। ऐसे में चार्टर विमान और हेलीकॉप्टर उनके लिए महत्वपूर्ण साधन बन जाते हैं। इसके अलावा खेल टीमों, फिल्म कलाकारों और आपात चिकित्सा सेवाओं में भी निजी विमानन का उपयोग बढ़ रहा है।
हालांकि इस क्षेत्र की प्रगति के सामने कई चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी समस्या बुनियादी ढांचे की है। देश में हवाई अड्डों की संख्या जरूर बढ़ी है, लेकिन निजी विमानन के लिए जरूरी सुविधाएं अभी पर्याप्त नहीं हैं। कई हवाई अड्डों पर विमानों की पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। विमान रखने के लिए हैंगर की कमी है। मरम्मत और रखरखाव की सुविधाएं भी सीमित हैं। इससे विमान संचालकों की लागत बढ़ जाती है। वित्तपोषण भी एक बड़ी चुनौती है। एक आधुनिक बिजनेस जेट की कीमत कई करोड़ रुपये होती है। भारत में विमान खरीदने के लिए आसान और सस्ती वित्तीय व्यवस्था अभी विकसित नहीं हो सकी है। यही कारण है कि कई कंपनियां विदेशी लीजिंग व्यवस्था का सहारा लेती हैं। इससे खर्च बढ़ता है और विदेशी मुद्रा पर भी निर्भरता रहती है।
सरकार ने हाल के वर्षों में विमान लीजिंग को बढ़ावा देने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। गुजरात के गिफ्ट सिटी को विमान लीजिंग का केंद्र बनाने की दिशा में प्रयास किए गए हैं। यह एक सकारात्मक पहल है, लेकिन इसे और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि भारतीय कंपनियों को विदेशों पर कम निर्भर रहना पड़े। कर व्यवस्था और नियमों को लेकर भी उद्योग की कुछ शिकायतें हैं। विमान आयात करने, उसके रखरखाव और संचालन में कई तरह के कर और शुल्क लगते हैं। इसके अलावा कई अनुमतियां प्राप्त करने में भी समय लगता है। उद्योग का मानना है कि यदि प्रक्रियाएं सरल हों और लागत कम हो, तो इस क्षेत्र का विकास और तेजी से हो सकता है।
यह समझना जरूरी है कि निजी विमानन केवल अमीर लोगों की सुविधा नहीं है। दुनिया के कई विकसित देशों में इसे आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण साधन माना जाता है। यह उन क्षेत्रों को जोड़ता है, जहां नियमित हवाई सेवाएं नहीं पहुंच पातीं। इससे व्यापार, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलता है। विमानन क्षेत्र से पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन, ग्राउंड स्टाफ और अन्य सेवाओं से जुड़े हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। भारत में निजी विमानन के लिए संभावनाएं बहुत बड़ी हैं। देश में उद्योग, व्यापार और निवेश लगातार बढ़ रहे हैं। नए आर्थिक केंद्र विकसित हो रहे हैं। ऐसे में तेज और सुविधाजनक हवाई संपर्क की जरूरत भी बढ़ेगी।
यदि सरकार हवाई अड्डों की सुविधाओं का विस्तार करे, विमान पार्किंग और रखरखाव की व्यवस्था बेहतर बनाए तथा वित्तीय और नीतिगत सुधारों को आगे बढ़ाए, तो यह क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति में बड़ी भूमिका निभा सकता है। निजी विमानन की बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि भारत तेजी से बदल रहा है। देश में आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं और लोगों की यात्रा संबंधी जरूरतें भी बदल रही हैं, लेकिन केवल मांग बढ़ने से विकास नहीं होता। उसके लिए मजबूत ढांचा, सरल नियम और बेहतर वित्तीय व्यवस्था भी जरूरी होती है। यदि इन कमियों को दूर किया जाए, तो निजी विमानन आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक ताकत को और मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकता है।
