कानपुर की ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड को मिला पैराशूट तकनीक का पेटेंट, 230 करोड़ के रिकॉर्ड कारोबार के साथ रचा इतिहास
कानपुर, अमृत विचार। ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (जीआईएल व पैराशूट फैक्ट्री) को कोनिकल स्प्रिंग कंप्रेशन लोड टेस्टिंग का पेटेंट मिल चुका है। इसका मतलब पैराशूट में उपयोग होने वाली शंक्वाकार स्प्रिंग्स की जांच ग्लाइडर्स इंडिया के पेटेंट के तहत ही की जा सकेगी। कोई इसका प्रयोग बिना जीआईएल के नहीं कर सकता।
पैराशूट की सुरक्षा में अहम भूमिका
कोनिकल स्प्रिंग का सबसे अहम काम अचानक झटकों को सहना और पैराशूट को सही तरीके से हवा में बिना उलझे खुलना होता है। इसी साल 01 अप्रैल से शुरू हुए मौजूदा वित्तीय वर्ष में जीआईएल ने 11 नए पेटेंट दाखिल किए गए हैं। कंपनी की ओर से अब तक कुल 75 पेटेंट दाखिल हुए हैं और 32 को मंत्रालय की ओर से स्वीकृति दी जा चुकी है।
आरएंडडी पर 4.68 करोड़ का निवेश, 230 करोड़ का रिकॉर्ड कारोबार
दूसरी ओर आत्मनिर्भर और मेक इन इंडिया के तहत अपने उत्पादों का छोटा-छोटा काम एमएसएमई इकाईयों से करा रही है। जीआईएल ने स्वदेशी तकनीक के लिए अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) पर 4.68 करोड़ रुपये का निवेश किया है। कंपनी के सभी उत्पाद 100 प्रतिशत स्वदेशी रूप से बनाए जा रहे हैं।ग्लाइडर्स इंडिया अब रक्षा क्षेत्र में विदेशी देशों की निर्भरता नहीं रह गयी है। कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे ज्यादा 230 करोड़ रुपए से ज्यादा के रक्षा उत्पादों का सौदा किया है जिसमें कंपनी को मोटे तौर पर 34 करोड़ रुपये का लाभ भी मिला है।
85 वर्षों की गौरवशाली विरासत
वर्ष 1941 में स्थापित ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री की विरासत को आगे बढ़ाते हुए जीआईएल ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। 1947-48 के जम्मू-कश्मीर अभियान, 1962 के युद्ध, 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों से लेकर सियाचिन में तैनात सैनिकों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने में इसके पैराशूट और एरिया डिलीवरी सिस्टम महत्वपूर्ण साबित हुए हैं।
राम मंदिर की ध्वजा भी बनाई
ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड ने अयोध्या के राम मंदिर की मुख्य ध्वजा का निर्माण भी किया है, जिसे कानपुर के लिए गौरव का विषय माना जाता है। कंपनी रोजगार सृजन, कौशल विकास और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत कर रही है।
सीएमडी बोले- कर्मचारियों की मेहनत का नतीजा
जीआईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एम.सी. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि 230 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड टर्नओवर और 34 करोड़ रुपये का लाभ कर्मचारियों की मेहनत, नवाचार और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कंपनी स्वदेशी तकनीक, अनुसंधान एवं विकास तथा गुणवत्ता के माध्यम से देश की रक्षा आवश्यकताओं को और मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। इस दौरान निदेशक वित्त एस पटनायक, सीजीएम जीआईएल चंद्रशेखर, महाप्रबंधक जीआईएल विवेक गुप्ता, ओआईटीसी केके टोप्पो, एजीएम राम ज्ञान सिंह, अनुराग यादव, आशीष कुमार, तकनीकी सलाहकार (ग्रुप कैप्टन सेवानिवृत्त) विवेक दुबे, डीजीएम रूपेश कुमार, वरिष्ठ प्रबंधक ओमेश सिन्हा, प्रबंधक ब्रजेंद्र सिंह आदि रहे।
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