राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण : अजय राय बोले- मामले में लीपापोती का प्रयास कर रही एसआईटी
लखनऊ। अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इस बीच कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा है कि सरकार किसी सिटिंग जज से पूरे मामले की जांच कराएगी, तभी असली सच्चाई सामने आएगी।
गौरतलब है कि मंगलवार को एसआईटी के चेयरमैन और लखनऊ मंडलायुक्त आईएएस विजय विश्वास पंत ने मंगलवार को अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को रिपोर्ट सौंपी थी। एसआईटी रिपोर्ट को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में अजय राय ने कहा, "एसआईटी जांच तो केवल पूरे मामले को भटकाने का प्रयास है। एसआईटी जांच में सच्चाई सामने नहीं आएगी। जब तक पूरे प्रकरण की जांच किसी सिटिंग जज की अध्यक्षता में नहीं होगी तब तक कुछ सामने नहीं आएगा। पूरे मामले पर लीपापोती करने का प्रयास हो रहा है।"
अजय राय ने राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले को लेकर केंद्र और संबंधित संगठनों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने जांच रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक करने की मांग की और कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि श्रीरामजन्मभूमि ट्रस्ट में एक सेवानिवृत्त नौकरशाह नृपेंद्र मिश्रा को चेयरमैन बनाया गया, जो पांच साल तीन महीने तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव थे। यानी इस संगठित लूट के जिम्मेदार प्रधानमंत्री मोदी भी हैं। पहले भाजपा और आरएसएस के लोगों ने श्रीरामजन्मभूमि में शिलापूजन के नाम पर खूब पैसे वसूले, जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं है।
ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री योगी ने राम मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर 14 मई को एसआईटी का गठन किया था और 15 दिन में जांच पूरी करने का समय दिया था। टीम ने अयोध्या में छह दिनों तक राम मंदिर परिसर में जांच की। एसआईटी के चेयरमैन विजय विश्वास पंत ने कहा कि अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव को सौंप दी है। जो भी फाइंडिंग थी उसको शामिल किया गया है। अभी इसके बारे में इससे ज़्यादा कुछ नहीं बताया जा सकता है।
विशेष जांच दल में चेयरमैन लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी लखनऊ रेंज किरण शिवकुमार और यूपी फाइनेंस एंड अकाउंट्स सर्विस के विशेष सचिव (वित्त) नीलरतन कुमार शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी की रिपोर्ट करीब 150 पन्नों की है। इसमें 150 लोगों से पूछताछ का विवरण शामिल है। टीम ने सिफारिश की है कि मंदिर की व्यवस्था के लिए किसी वरिष्ठ अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया जाए।
