Cabinet Meeting: यूपी में स्टार्टअप और डेटा सेंटर्स के लिए नई नीतियां मंजूर, श्रमिकों के बच्चों के लिए मेडिकल कॉलेज में 50% सीटें आरक्षित

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, श्रम मंत्री अनिल राजभर और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने पत्रकारों को मंत्रिमंडल की बैठक में हुये निर्णयों की जानकारी दी।

कैबिनेट ने निवेश, उद्योग, नवाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और शहरी विकास से जुड़े महत्वपूर्ण फलों पर मुहर लगाई। इनमें उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन-2026, नई डेटा सेंटर नीति, मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन पशुधन बीमा योजना के राज्यव्यापी विस्तार तथा शाहजहांपुर की जलालाबाद नगर पालिका का नाम बदलकर परशुरामपुरी किए जाने का निर्णय प्रमुख रहा।

'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026' और नए निदेशालय को मंजूरी

उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने राज्य में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष 'स्टार्टअप मिशन निदेशालय' के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पंजीकृत स्टार्टअप की संख्या को और बढ़ाने के लिए 'इनक्यूबेटर्स' तथा 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।


'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन-2026' के तहत स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए गवर्निंग बॉडी का अध्यक्ष मुख्य सचिव को बनाया जाएगा, जबकि मिशन के प्रभावी संचालन के लिए एक कार्यकारी समिति का गठन होगा। अभी तक स्टार्टअप कार्यक्रम का संचालन केवल उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन (यूपीएलसी) करता था, लेकिन अब इसके लिए एक अलग समर्पित इकाई होगी, जिसमें मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी तैनात होंगे।

डेटा सेंटर नीति

इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने समाप्त हो चुकी नीति के स्थान पर 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026' और नई 'डेटा सेंटर नीति' से संबंधित प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। मंत्री सुनील शर्मा ने कहा कि डेटा सेंटर अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और भारत का अधिक से अधिक डेटा देश में ही सुरक्षित रहे, इसके लिए नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं।


पशुधन बीमा योजना का विस्तार और होमगार्ड्स को कैशलेस इलाज

75 जिलों में बीमा योजना: सरकार ने 'मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन पशुधन बीमा योजना' को प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने का फैसला किया है। इस योजना के तहत बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत अंशदान राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी, जिससे पशुपालकों को बड़ी आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। होमगार्ड्स को तोहफा: प्रदेश के लगभग 69 हजार होमगार्ड स्वयंसेवकों और उनके आश्रितों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई है।


स्वास्थ्य, शिक्षा और खेल के क्षेत्र में बड़े निर्णय

श्रमिकों के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए गोरखपुर और मुरादाबाद में पांच-पांच एकड़ भूमि पर ईएसआई (ESI) अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा वाराणसी में 13 एकड़ भूमि पर ईएसआईसी (ESIC) मेडिकल कॉलेज खोला जाएगा, जहां 50 प्रतिशत सीटें श्रमिकों के बच्चों के लिए आरक्षित रहेंगी। निजी क्षेत्र में तीन नए विश्वविद्यालयों की स्थापना को स्वीकृति दी गई है, जिनमें महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय (बिल्हौर, कानपुर), अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय (गाजियाबाद) तथा ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय (फतेहपुर) शामिल हैं। कैबिनेट ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की सीधी भर्ती संबंधी नियमावली में संशोधन को भी मंजूरी दी।

जलालाबाद का नाम अब 'परशुरामपुरी', नगर निकायों को म्यूनिसिपल बॉन्ड

नगर विकास विभाग के प्रस्ताव पर शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद का नाम बदलकर अब "परशुरामपुरी" करने का निर्णय लिया गया है।गोरखपुर और मुरादाबाद नगर निगमों के लिए म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने तथा उनकी क्रेडिट रेटिंग सुधारने के लिए अवस्थापना विकास निधि से धन उपलब्ध कराने की मंजूरी दी गई है। वाराणसी रोप-वे: कैबिनेट ने वाराणसी रोप-वे परियोजना के लिए चिन्हित नजूल भूमि वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) को उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी है।

इसके अलावा, बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) संचालन एवं अनुरक्षण नीति-2026, पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय के बाद शेष धनराशि के उपयोग, सातवें वेतन आयोग के अनुरूप उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की पेंशन के पुनरीक्षण सहित कई प्रशासनिक और सेवा नियमावली संशोधनों को मंजूरी दी गई। सरकार का मानना है कि इन दूरगामी निर्णयों से प्रदेश में भारी निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

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