पंजाब के गुरुद्वारों में प्रोजेक्टर पर हो रही सतलुज की स्क्रीनिंग, OTT से बैन के बाद गांव-गांव पहुंची फिल्म

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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अमृतसर। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित फिल्म 'सतलुज' (जिसका पूर्व शीर्षक 'पंजाब 95' था) को ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद अब इसकी डाउनलोड की गई प्रतियां पंजाब के विभिन्न गांवों में सार्वजनिक रूप से दिखाई जा रही हैं। सेंसरशिप और पाबंदियों के विरोध में, खासकर माझा क्षेत्र के कई गांवों में गुरुद्वारों और खुले मैदानों में प्रोजेक्टर और बड़ी एलईडी (LED) स्क्रीन के माध्यम से रात के समय इस फिल्म की स्क्रीनिंग की जा रही है।

गुरुद्वारों के प्रांगण में उमड़ रही है भारी संगत

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरदासपुर जिले के शेखूपुरा और पंजबड़ गांवों में मंगलवार रात स्थानीय युवाओं ने एक बड़ा कदम उठाया। युवाओं ने गांव के गुरुद्वारों के प्रांगण में बड़ी स्क्रीन लगाकर फिल्म का प्रदर्शन किया। इस विशेष स्क्रीनिंग को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और सिख संगत एकत्रित हुई।

इसी तरह अमृतसर जिले के पंडोरी गांव तथा तरनतारन जिले के कई अलग-अलग गांवों में भी फिल्म दिखाई गई है। स्थानीय युवा संगठनों के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक संगठनों, किसान संगठनों और सामाजिक समूहों ने भी इन सार्वजनिक स्क्रीनिंग की व्यवस्था में अपना पूरा सहयोग दिया है।

मोगा समेत कई जिलों के गांवों में प्रदर्शन की योजना

गुरदासपुर में खेल प्रमोटर सुल्तान सिंह ने अपने पैतृक गांव में खिलाड़ियों और ग्रामीणों के लिए इस फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन किया। वहीं, अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के नेता राशपाल सिंह सोसन ने बताया कि मंगलवार रात दरौली भाई और घाल कलां गांवों में भी फिल्म की स्क्रीनिंग की गई, जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। उन्होंने आगे जानकारी दी कि बुधवार को मोगा जिले के चार अन्य गांवों में भी इसी तरह के सार्वजनिक प्रदर्शन आयोजित किए जाने की योजना है।

"सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता", सामाजिक संगठनों का आरोप

राशपाल सिंह सोसन ने आरोप लगाया कि फिल्म को रोकने या ओटीटी प्लेटफॉर्म से जबरन हटाने से लोग जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन, उनके संघर्ष और बलिदान के बारे में जानने से नहीं रुकेंगे। उनका कहना था, "खालड़ा ने सच को सामने लाने के लिए अपना जीवन बलिदान किया था और फिल्म में दिखाए गए ऐतिहासिक तथ्यों को इसकी उपलब्धता सीमित करके दबाया नहीं जा सकता।"

रिलीज़ के दो दिन बाद ही 'जी5' से हटा दी गई थी फिल्म

गौरतलब है कि मशहूर अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ अभिनीत यह फिल्म पूरी तरह से जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। भारत में रिलीज होने के मात्र दो दिन बाद ही इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म 'जी5' (Zee5) से हटा लिया गया था। इस कदम के बाद स्थानीय युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) सहित विभिन्न संगठनों ने फिल्म को डाउनलोड कर लिया है और अब गांव-गांव जाकर इसकी सार्वजनिक स्क्रीनिंग शुरू कर दी है।

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