Hardoi News : साहब...ऐसे कब तक छिपाते रहेंगें 'अपनों' की नाकामी ? हरदोई स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल, जानिए क्या है पूरा मामला 

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Published By Anjali Singh
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मौत पर मौत होने के मामलों में निजी हास्पिटल ही नहीं हैं बल्कि स्वास्थ्य महकमां भी है बराबर का ज़िम्मेदार

हरदोई। प्रसूता के बाद जच्चा-बच्चा और उसके बाद फिर एक प्रसूता की मौत होने में अकेले निजी हास्पिटल को ही ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता,क्योंकि उनके साथ स्वास्थ्य महकमां भी बराबर का ज़िम्मेदार है!लोग ऐसा इस लिए बोल रहें हैं कि अक्सर देखा गया है कि इस तरह की मौत के मामले में पहले तो नाकामी छिपाने की कोशिश की जाती है या फिर उस निजी हास्पिटल को सीज़ करने का ढ़िढोंरा पीट-पीट कर कान सुन्न कर दिए जाते है ताकि फिर कुछ सुनाई न दे सकें। शहर के नर्सिंग होम और बेहंदर के निजी हास्पिटल में जच्चा-बच्चा की लापरवाही से हुई मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था,उसी बीच सीएचसी बेहंदर में डाक्टर के न होने से प्रसूता की मौत से कोहराम बरपा हो गया। प्रसूता की मौत ने ज़िम्मेदारों की नाकामी को सामने लाते हुए तमाम तरह के सवाल खड़े कर दिए है।

मौत का पहला मामला-6 जुलाई को पाली थाने के गुरुधरु मजरा दौलतपुर के प्रमोद कुमार बाजपेई की पत्नी रुचि को शहर के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया,वहां रुपये जमा कराने के बाद इलाज शुरु हुआ,लेकिन उसी बीच हालत बिगड़ती देख उसे लखनऊ के एक निजी हास्पिटल के लिए रेफर कर दिया। प्रमोद के मुताबिक वहां के डाक्टरों ने बताया कि उसकी पत्नी की लखनऊ पहुंचने से करीब दो घंटे पहले ही मौत हो चुकी थी। पुलिस ने अगले दिन शव का पोस्टमार्टम कराया,जिसकी रिपोर्ट में रुचि के सिर और पीठ पर चोंटे होने की बात से साबित हो गया कि कहीं न कहीं बरती गई लापरवाही से ही रुचि की मौत हुई। पोस्टमार्टम रख आने के बाद आगे क्या हुआ ? इसका कुछ भी पता नहीं चल रहा है।

मौत का दूसरा मामला-7 जुलाई को कासिमपुर थाने के रसूलपुर ब्रह्मनान निवासी दिनेश की पत्नी सीमा को बेहंदर के एक निजी हास्पिटल में भर्ती कराया गया,जहां उसके प्रसव होने के कुछ ही देर बाद बच्चे की मौत हो गई,कोई कुछ समझ पाता,उसी बीच सीमा की हालत बिगड़ी और उसने भी दम तोड़ दिया। जच्चा-बच्चा की मौत पर बवाल होने पर स्वास्थ्य महकमें की टीम ने निजी हास्पिटल को सीज़ कर दिया। पुलिस ने अगले दिन दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया,जिसकी रिपोर्ट में बच्चें की सिर में चोंट पहुंचने और पेट में खून के थक्के जमने से उसकी मां की मौत हुई,मतलब साफ है कि उसमें भी लापरवाही बरती गई थी।

मौत का तीसरा मामला-10 जुलाई को कासिमपुर थाने के बेहगावां मजरा तलौली की शेषकली पत्नी मनसुख को पहली प्रसव पीड़ा होने पर सीएचसी बेहंदर पहुंचाया गया,वहां डाक्टर की गैर मौजूदगी में उसके प्रसव हुआ,लेकिन कुछ ही देर बाद ब्लीडिंग होने लगी,लेकिन तीन-तीन महिला डाक्टरों की तैनाती होते हुए भी उस वक्त सीएचसी में  एक भी महिला डाक्टर नज़र नहीं आई,नतीजतन मातहतों की नाकामी छिपाते हुए अधीक्षक डा.डीपी भारती आगे आए और प्रसूता को रेफर कर अपनी ज़िम्मेदारी से बरी हो गए।घबराए घर वाले शेषकली को सण्डीला के एक निजी हास्पिटल उठा ले गए,जहां पहुंचते ही उसकी मौत हो गई।

CMO का बयान 

अस्पतालों में हो रही लापरवाही और मौतों के मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. भावनाथ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विभाग सभी मामलों को बेहद गंभीरता से ले रहा है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। सीएमओ डॉ. भावनाथ ने बताया, "इन सभी निजी अस्पतालों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज कब्जे में ले लिए गए हैं और उनके आधार पर गहनता से जांच की जा रही है। जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित अस्पताल और डॉक्टरों के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाए जाएंगे। किसी भी दोषी को कतई बख्शा नहीं जाएगा।

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