बरेली: चार साल की लंबी जांच, समिति भंग होने से शिक्षक-कर्मचारी खुश

बरेली: चार साल की लंबी जांच, समिति भंग होने से शिक्षक-कर्मचारी खुश

बरेली, अमृत विचार। बरेली कॉलेज में अनियमितताओं की शिकायत वर्ष 2018 में हुई थी। 28 दिसंबर 2018 को प्रबंध समिति के विरुद्ध प्राधिकृत नियंत्रक नियुक्त करने की संस्तुति की गई थी। चार साल की लंबी जांच प्रक्रिया के बाद अब समिति भंग कर डीएम को प्राधिकृत नियंत्रक नियुक्त किया गया है। समिति भंग होने से कर्मचारी और शिक्षकों में खुशी है। वहीं, मंगलवार को जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी से प्राचार्य प्रो. ओपी राय मिले और आगे की कार्रवाई को लेकर वार्ता की।

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शासन के उच्च शिक्षा अनुभाग के विशेष सचिव डा. अखिलेश कुमार मिश्रा ने सोमवार को प्रबंध समिति को भंग करने का आदेश जारी किया है। इसमें अनियमितताओं के आरोपों, प्रबंध समिति के सचिव के जवाबों से संतुष्ट न होने और जांच का जिक्र किया गया है। प्रबंध समिति पर जो आरोप लगे थे, उनमें वर्ष 2017-18 एवं 2018-19 में दर्शायी गई आय के सापेक्ष वास्तविक व्यय परीक्षण बजट 2016-17 एवं 2017-18 के अनुमानित व्यय से वास्तविक अंतर पाया गया और इस संबंध में कार्यालय द्वारा कोई स्पष्टीकरण या प्रपत्र मांगने पर भी प्रस्तुत नहीं किए गए। 

इस आरोप में संस्था के उत्तर के बाद जांच समिति ने पाया कि 2016-17 में निर्मित स्टाफ क्वाटर्स का बजट का प्रावधान 3 करोड़ है, जो इस मद के बजट के प्रावधान में 72 लाख कम है। वर्ष 2017-18 में रिनोवेशन का उल्लेख है न कि नए निर्माण का, और इसकी धनराशि सिर्फ 50 लाख अनुमानित रही। विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत नियमों के विपरीत बजट बनाया गया। कैंपस क्लीनिंग, ब्यूटीफिकेशन में भी गड़बड़ी की गई। 

दूसरा आरोप महाविद्यालय के बजट वर्ष 2016-17 में अनुमानित व्यय की व्यवस्था न होने पर भी कंस्ट्रक्शन ऑफ न्यू स्टाफ क्वार्टर की मद में 4395858 की धनराशि खर्च की गई, जिसके बाउचर भी प्रस्तुत नहीं किए गए। जांच में इसमें भी गड़बड़ी पाई गई। तीसरे आरोप में स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों में होने वाली आय से किसी प्रकार का मानदेय महाविद्यालय के नियमित शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी को नहीं दिया जाएगा, लेकिन धनराशि का भुगतान किया गया। इसमें भी संस्था के उत्तर से जांच समिति संतुष्ट नहीं हुई। 

जांच में पाया गया कि वाहन व्यय, फोन व्यय और प्रोत्साहन मानदेय व्यय का भुगतान किया गया। चौथे आरोप में निर्माण कार्यों में 1714867 रुपये का कार्य बिना निविदा के कराया गया। लेखा बजट से वर्ष 2016-17 में 18406274 रुपये और 2017-18 में 11437532 रुपये की कुल धनराशि 29843806 व्यय की गई, जिसके सापेक्ष 29551744 रुपये का खर्च जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। तकनीकि बिड की जांच भी लोक निर्माण विभाग की तकनीकि टीम से नहीं कराई गई। फर्मों को किए गए भुगतान का विवरण बिल बाउचर्स पर अंकित नहीं है। जांच समिति ने इस आरोप को भी सही पाया है।

शिक्षकों के अटके काम होंगे पूरे
वहीं समिति भंग होने से कॉलेज के शिक्षक भी अंदर ही अंदर खुश हैं, लेकिन अभी खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं, क्योंकि शिक्षकों के कई काम और धनराशि समिति की वजह से रुकी हुई थी। अब उम्मीद है कि शिक्षकों के अटके काम आराम से पूरे हो जाएंगे। कई शिक्षकों ने वर्कशॉप अपनी जेब से कराईं, इसका खर्च ही उन्हीं नहीं मिला। इसके अलावा भी कई रिसर्च ग्रांट का भी पैसा नहीं मिला। इसके अलावा भी कई अन्य समस्याएं शिक्षकों की थीं, जो अब पूरी होती दिख रही हैं।

कर्मचारी तय करेंगे आगे की रणनीति
बरेली कॉलेज प्रबंध समिति भंग होने से सबसे ज्यादा खुश कर्मचारी हैं। कर्मचारियों ने मंगलवार को कॉलेज में मिठाई बांटी। कर्मचारी कल्याण सेवा समिति के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि समिति लंबे समय से कॉलेज में प्रशासक बैठाने की मांग कर रही थी। कॉलेज की अनियमितताओं की शिकायतें भी शासन स्तर पर की थीं। अब समिति भंग होने से कर्मचारी काफी खुश हैं। कर्मचारियों की बुधवार दोपहर 1 बजे बैठक पुस्तकालय सभागार में बुलाई गई है। जिसमें आगे की रणनीति पर मंथन किया जाएगा। कर्मचारियों ने दो दिन पूर्व ही आने वाले दिनों में आंदोलन की चेतावनी दी थी।

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