लखनऊ फर्जी कॉल सेंटर केस: हर साइबर ठगी के लिए अलग 'कोड वर्ड', हवाला से महीने में दो बार पहुंचती थी रकम
समिट बिल्डिंग से पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर की जांच में नए खुलासे। पुलिस के अनुसार हवाला नेटवर्क, विदेशी कोड वर्ड और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के जरिए ठगी की रकम भारत लाई जाती थी। मुख्य आरोपी की तलाश जारी।
लखनऊ, अमृत विचार: समिट बिल्डिंग में पकड़े गये फर्जी कॉल सेंटर से मिले दस्तावेजों की जांच पुलिस ने शुरू कर दी है। जांच में सामने आया कि गिरोह ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का नेटवर्क खड़ा कर रखा था। इसके लिए विशेष कोड वर्ड का प्रयोग किया जाता था। हर ठगी के रकम को हासिल करने के लिए अलग-अलग कोड वर्ड होता था। एक महीने में दो बार ठगी की रकम हवाला के जरिये उन तक पहुंचती थी। इस रकम को हासिल करने के लिए किसी दूसरे देश का नोट या मोबाइल नंबर कोर्ड वर्ड होता था। जिसे देने के बाद रकम उनको मिल जाती है। हर लेनदेन का कोड पहले भेजा जाता था, उसी की मदद से रकम ली जाती थी।
पुलिस के मुताबिक, ठगी से अर्जित धनराशि महीने में दो बार हवाला के जरिए मंगाई जाती थी। रकम लेने वाले व्यक्ति को पहले एक विशेष कोड भेजा जाता था। यह कोड कभी किसी विदेशी देश की मुद्रा के नोट का नंबर होता था तो कभी किसी मोबाइल नंबर का हिस्सा। हवाला नेटवर्क से जुड़े व्यक्ति को वही कोड बताने पर नकदी सौंपी जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया में बैंकिंग चैनल का इस्तेमाल नहीं किया जाता था। जिससे लेनदेन का रिकार्ड न बन सके। जांच में सामने आया है कि काल सेंटर के कर्मचारियों पर प्रतिदिन 10 से 12 विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने का लक्ष्य तय किया जाता था। कर्मचारियों की निगरानी लगातार की जाती थी। हर महीने सबसे अधिक ठगी करने वाले कर्मी को पुरस्कार दिया जाता था। उसे नकद प्रोत्साहन के साथ उपहार भी दिए जाते थे। इसी लालच के कारण कई युवक-युवतियां इस अवैध कारोबार से जुड़े रहे। उधर, काल सेंटर का मुख्य संचालक विनीत शर्मा अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है। पुलिस को उसके काल रिकार्ड से कई महत्वपूर्ण नंबर मिले हैं। इनमें पश्चिम बंगाल की एक महिला मित्र का नंबर भी शामिल है, जिससे वह लगातार संपर्क में रहता था। पुलिस उस महिला की तलाश कर रही है। उसके जरिए आरोपी की लोकेशन संबंधी अहम जानकारी मिल सकती है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी राजनीतिक संरक्षण लेने के प्रयास में है, ताकि गिरफ्तारी से बच जाए। पुलिस हवाला नेटवर्क से जुड़े उन लोगों की पहचान में जुटी है। जिन्होंने ठगी की रकम को देश में पहुंचाने में भूमिका निभाई। इस पूरे नेटवर्क के तार देश के बड़े हवाला सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं।
काल सेंटर के लोगों को सीधे नहीं मिलती थी रकम
पुलिस के मुताबिक, यह रकम पहले अमेरिका में एकत्रित की जाती थी, गिफ्ट कार्ड, गोल्ड या क्रिप्टो करेंसी के रूप में। फिर वहां से रूस भेजकर उसको डाॅलर में कनवर्ट करवाते थे। वहां से हवाला ग्रुप उसको किसी न किसी तरीके से चीन पहुंचाता था। वहां पर रकम को भारतीय मुद्रा में बदल कर भारत भेज देते थे। यही नहीं प्रोग्राम मैनेजर को रकम नकद में भेजी जाती थी, फिर वह अलग-अलग खातों में रकम डालकर सभी जालसाजों को खाते में सैलरी देते थे। यही नहीं एक साइबर एक्सपर्ट का दावा है कि इन जालसाजों पर पुलिस को अपराध सिद्ध करने में बहुत कठनाइयों को सामना करना पड़ेगा।
यह थी घटना
समिट बिल्डिंग में संचालित फर्जी काल सेंटर पर पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने बुधवार को छापा मारकर 119 लोगों को गिरफ्तार किया था। काल सेंटर से अमेरिकी नागरिकों को तकनीकी सहायता, गिफ्ट कार्ड और अन्य बहानों से झांसे में लेकर करोड़ों रुपये की ठगी की जाती थी।
