Raebareli News : नर्सिंग होम में लापरवाही से मासूम की मौत, डीएम के निर्देश पर दो डॉक्टरों समेत 5 पर FIR
रायबरेली। दस वर्षीय मासूम शिवानी की मौत से जुड़े बहुचर्चित मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी (डीएम) सरनीत कौर ब्रोका के सख्त निर्देश के बाद शहर कोतवाली पुलिस ने जेल रोड स्थित वेदांता नर्सिंग होम के डॉ. निशांत सिंह, शाश्वत नर्सिंग होम के डॉ. अमित सिंह तथा दोनों अस्पतालों के तीन अन्य स्टाफ सदस्यों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह एफआईआर मृतका के पिता शरद सिंह की तहरीर पर दर्ज की गई है।
टॉन्सिल ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप
परिजनों के अनुसार, शिवानी को पहले वेदांता नर्सिंग होम में दिखाया गया था, जहां से उसे टॉन्सिल के ऑपरेशन के लिए शाश्वत नर्सिंग होम रेफर किया गया। आरोप है कि शाश्वत हॉस्पिटल में ऑपरेशन के दौरान और उसके बाद इलाज में घोर लापरवाही बरती गई, जिससे बच्ची की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। हालत बेहद नाजुक होने पर उसे गंभीर अवस्था में लखनऊ के उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया। रेफरल दस्तावेजों के मुताबिक, आपातकालीन प्रक्रियाओं के दौरान खून का श्वास नली में चले जाना, श्वसन विफलता (रेस्पिरेटरी फेल्योर), ईटी सक्सन और ट्यूब वेंटिलेशन जैसी गंभीर स्थितियां दर्ज थीं। कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद आखिरकार शिवानी ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश फैल गया।
डीएम की फटकार के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप
इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग के ढुलमुल रवैये के कारण प्रशासन की भी जमकर किरकिरी हो रही थी। बुधवार को जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका ने मामले की समीक्षा के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. नवीन चंद्रा और एसीएमओ डॉ. अंबिका को जमकर फटकार लगाई। डीएम ने कार्रवाई में देरी और लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि जांच को केवल औपचारिकता नहीं बनने दिया जाएगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए।
आरोपियों को बचाने में लगा रहा स्वास्थ्य महकमा
सूत्रों के अनुसार, पूरे प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका बेहद निराशाजनक और संदिग्ध रही। मासूम की मौत के बाद भी सीएमओ केवल 'मामला संज्ञान में होने और जांच कराए जाने' का रटा-रटाया बयान देते रहे। हैरत की बात यह रही कि सीएमओ जिले में पंजीकृत नर्सिंग होम की कुल संख्या तक नहीं बता सके। चर्चा है कि सीएमओ अपनी ऊंची पहुंच का दावा कर मामले पर लीपापोती करने और आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहे थे, जिससे सरकार की छवि भी धूमिल हो रही थी।
पुलिस ने शुरू की गहन जांच
डीएम की इस सख्त कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य महकमे और निजी अस्पतालों में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, जांच के दायरे में ऑपरेशन की पूरी प्रक्रिया, उपचार के रिकॉर्ड, रेफरल की परिस्थितियां और संबंधित डॉक्टरों व स्टाफ की भूमिका को शामिल किया गया है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी।
