यूपी के पिछड़े जिलों में सिमट रहा ATM नेटवर्क, दो साल में 30% तक आई गिरावट

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Published By Muskan Dixit
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SLBC रिपोर्ट में बड़ा खुलासा— आठ आकांक्षी जिलों में प्रति एक लाख आबादी पर एटीएम की संख्या घटी, जबकि डेबिट कार्ड उपयोगकर्ताओं में हुई बढ़ोतरी

लखनऊ।उत्तर प्रदेश के कई आकांक्षी और पिछड़े जिलों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच को लेकर चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में प्रदेश के आठ आकांक्षी जिलों में प्रति एक लाख आबादी पर उपलब्ध एटीएम की संख्या में करीब 30 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है। दूसरी ओर, इसी अवधि में डेबिट कार्ड धारकों की संख्या लगातार बढ़ी है।

आठ जिलों में घटा एटीएम नेटवर्क

रिपोर्ट के मुताबिक बहराइच, बलरामपुर, चंदौली, चित्रकूट, फतेहपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और सोनभद्र जैसे जिलों में मार्च 2024 के दौरान प्रति एक लाख आबादी पर 6.74 एटीएम उपलब्ध थे, जो मार्च 2026 तक घटकर 4.74 रह गए।

यह गिरावट ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब इन क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।

डेबिट कार्ड धारकों की संख्या में हुआ इजाफा

जहां एटीएम नेटवर्क सिमटा है, वहीं डेबिट कार्ड उपयोगकर्ताओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, इन जिलों में प्रति एक लाख आबादी पर डेबिट कार्ड धारकों की संख्या 39,227 से बढ़कर 43,985 हो गई है।

प्रदेशभर में कुल डेबिट कार्डों की संख्या बढ़कर 12.15 करोड़ तक पहुंच गई है।

विकसित जिलों को मिला अधिक लाभ

राज्य स्तर पर प्रति एक लाख आबादी पर एटीएम घनत्व 9.18 से बढ़कर 9.32 हो गया है, लेकिन इसका लाभ मुख्य रूप से विकसित जिलों तक सीमित रहा।

गौतमबुद्ध नगर में प्रति एक लाख आबादी पर 79.61 एटीएम उपलब्ध हैं, जो प्रदेश में सबसे अधिक हैं।

वहीं श्रावस्ती में यह संख्या केवल 2.68, बांदा में 3.17 और बहराइच में 3.35 एटीएम प्रति एक लाख आबादी पर दर्ज की गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में नकद बैंकिंग सेवाएं अब भी चुनौती

रिपोर्ट संकेत देती है कि ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में नकद बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। एटीएम नेटवर्क में कमी के कारण इन क्षेत्रों के लोगों को नकदी निकासी और अन्य बैंकिंग सेवाओं के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है।

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