राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण : गबन के पीछे हो सकता है मनोवैज्ञानिक कारण, बोले डॉ आलोक मनदर्शन- यह मनोवृत्ति से भी जुड़ा अपराध

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Published By Deepak Mishra
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राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर जिला अस्पताल के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने गबन और आर्थिक अपराधों के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। जानिए आत्ममुग्ध व्यक्तित्व और मानसिक प्रवृत्तियों का क्या है संबंध।

अयोध्या, अमृत विचार : राम मंदिर में चंदा चोरी का प्रकरण इन दिनों बेहद सुर्खियों में है। इसे लेकर सबके अपने-अपने तर्क है लेकिन मनोवैज्ञानिक इसे लेकर अलग बात कर रहे हैं। जिला अस्पताल के मनोपरामर्शदाता डॉ आलोक मनदर्शन का कहना है कि व्यक्ति या समूह द्वारा देखरेख की जिम्मेदारी निहित धन या संपत्ति की चोरी या गबन का मनोगतिकीय परिप्रेक्ष्य होता है। विभिन्न शोधों के अनुसार नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर या आत्ममुग्धत व्यक्ति के लोगों में संगठित आर्थित अपराध करने की संभावना प्रबल होती है।

नार्सिसिस्ट या आत्ममुग्ध वर्ग में प्रथम है ग्रैंडिओस नार्सिसिस्ट यानि ऐसे लोग दम्भी व अहंकारी होते है। दूसरा है विक्टिम नार्सिसिस्ट यानि ऐसे लोग खुद को दीन हीन दिखाकर शातिर कारनामे करते हैं। तीसरा है मलिग्नेंट नार्सिसिस्ट यानि ऐसे लोग क्रूर व संवेदनहीन तरीके से अपराधिक कृत्य को अंजाम देते हैं तथा इन्हें साइकोपैथ भी कहा जाता है।

चौथा वर्ग है कम्युनल नार्सिसिस्ट का जो बाहर से कम्युनिटी या समाज का हितैषी पर अंदर से समाजरोधी कृत्य में लिप्त होता है। जिला चिकित्सालय के मनोविश्लेषक डाॅ. आलोक मनदर्शन के अनुसार ब्रेन में रिवार्ड हार्मोन डोपामिन, मूड स्टेबलाइज़र हार्मोन सेरोटोनिन,लव हार्मोन ऑक्सीटोसिन व स्ट्रेस-बस्टर हार्मोन इन्डॉर्फिन होता है जो मेन्टल हेल्थ व स्वस्थ व्यक्तित्व के लिये जिम्मेदार है।

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