Lucknow News: फर्जी ट्रस्ट डीड से बैंक खाता खुलवाने का आरोप, हिंद मेडिकल कॉलेज के निदेशक दंपती पर धोखाधड़ी का केस दर्ज

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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आरबीएल बैंक में फर्जी ट्रस्ट डीड से बैंक खाते खुलवाने का मामला, शाखा प्रबंधक की अर्जी पर कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई रिपोर्ट

लखनऊ, अमृत विचार। हिंद चेरिटेबल ट्रस्ट की संस्थाओं हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज बाराबंकी व सीतापुर के निदेशक दंपति पर गाजीपुर थाने में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस ने यह कार्रवाई आरबीएल बैंक इंदिरानगर शाखा के प्रबंधक मलय मोहन की शिकायत पर की गई है।

आरोप है कि निदेशक दंपति डॉ. आमोद कुमार सचान और उनकी पत्नी डॉ. ऋचा मिश्रा ने फर्जी ट्रस्ट डीड के आधार पर बैंक खाता खुलवाया। जांच में खुलासा हुआ तो जान से मारने की धमकी दी। शाखा प्रबंधक ने आरोप लगाया कि पुलिस ने कार्रवाई नहीं की थी। इस कारण उनको कोर्ट की शरण में जाना पड़ा। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

आरएलबी बैंक इंदिरानगर शाखा प्रबंधक मलय मोहन के मुताबिक, वर्ष 2022 में हिंद चेरिटेबल ट्रस्ट की संस्थाओं हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, सफेदाबाद (बाराबंकी) तथा अटरिया (सीतापुर) के नाम से खाते खोले गए थे। इन खातों को डॉ. अमोद कुमार सचान और उनकी पत्नी ऋचा मिश्रा ने स्वयं को ट्रस्ट का अधिकृत पदाधिकारी बताते हुए खुलवाया था।

इसके लिए ट्रस्ट डीड और अन्य केवाईसी दस्तावेज दिया। मार्च 2026 में बैंक को ट्रस्ट के संबंध में दर्ज एक आपराधिक मामले की जानकारी हुई। इसके बाद विवेचना अधिकारी के निर्देश पर ट्रस्ट के खातों को 'नो-डेबिट' श्रेणी में डालते हुए उनके संचालन पर रोक लगा दी गई। बैंक प्रबंधन के मुताबिक, बाद में उपलब्ध कराई गई मूल ट्रस्ट डीड के जांच में सामने आया कि बैंक में जमा कराई गई ट्रस्ट डीड जाली थी। मूल ट्रस्ट डीड में कई अन्य ट्रस्टियों के नाम थे। जबकि बैंक में जमा दस्तावेज में केवल डॉ. अमोद कुमार सचान और ऋचा मिश्रा को ट्रस्टी बताया गया था।

शाखा प्रबंधक के मुताबिक, खातों पर रोक लगाए जाने के बाद 17 मार्च 2026 की रात डॉ. अमोद कुमार सचान ने उन्हें फोन कर खाते तत्काल संचालित करने का दबाव बनाया। मना करने पर अपशब्द कहे गए। परिवार सहित जान से मारने और नौकरी नहीं करने देने की धमकी दी गई। मोबाइल पर हुई इस बातचीत की रिकार्डिंग भी पुलिस को उपलब्ध कराई गई है। शाखा प्रबंधक मलय मोहन के मुताबिक, उन्होंने इस संबंध में गाजीपुर थाने और बाद में पुलिस आयुक्त को शिकायत की, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में अर्जी डाली। कोर्ट ने गाजीपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया। इंस्पेक्टर गाजीपुर राजेश मौर्य के मुताबिक, कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

 

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हिंद चेरिटेबल ट्रस्ट की संस्थाओं हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज बाराबंकी व सीतापुर के निदेशक दंपती पर गाजीपुर थाने में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस ने यह कार्रवाई आरबीएल बैंक इंदिरानगर शाखा के प्रबंधक मलय मोहन की शिकायत पर की गई है।

आरोप है कि निदेशक दंपती डॉ. आमोद कुमार सचान और उनकी पत्नी डॉ. ऋचा मिश्रा ने फर्जी ट्रस्ट डीड के आधार पर बैंक खाता खुलवाया। जांच में खुलासा हुआ तो जान से मारने की धमकी दी। शाखा प्रबंधक ने आरोप लगाया कि पुलिस ने कार्रवाई नहीं की थी। इस कारण उनको कोर्ट की शरण में जाना पड़ा। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

आरएलबी बैंक इंदिरानगर शाखा प्रबंधक मलय मोहन के मुताबिक वर्ष 2022 में हिंद चेरिटेबल ट्रस्ट की संस्थाओं हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, सफेदाबाद (बाराबंकी) तथा अटरिया (सीतापुर) के नाम से खाते खोले गए थे। इन खातों को डॉ. अमोद कुमार सचान और उनकी पत्नी ऋचा मिश्रा ने स्वयं को ट्रस्ट का अधिकृत पदाधिकारी बताते हुए खुलवाया था।

इसके लिए ट्रस्ट डीड और अन्य केवाईसी दस्तावेज दिया। मार्च 2026 में बैंक को ट्रस्ट के संबंध में दर्ज एक आपराधिक मामले की जानकारी हुई। इसके बाद विवेचना अधिकारी के निर्देश पर ट्रस्ट के खातों को ''नो-डेबिट'' श्रेणी में डालते हुए उनके संचालन पर रोक लगा दी गई। बैंक प्रबंधन के मुताबिक, बाद में उपलब्ध कराई गई मूल ट्रस्ट डीड के जांच में सामने आया कि बैंक में जमा कराई गई ट्रस्ट डीड जाली थी। मूल ट्रस्ट डीड में कई अन्य ट्रस्टियों के नाम थे। जबकि बैंक में जमा दस्तावेज में केवल डॉ. अमोद कुमार सचान और ऋचा मिश्रा को ट्रस्टी बताया गया था।

शाखा प्रबंधक के मुताबिक खातों पर रोक लगाए जाने के बाद 17 मार्च 2026 की रात डॉ. अमोद कुमार सचान ने उन्हें फोन कर खाते तत्काल संचालित करने का दबाव बनाया। मना करने पर अपशब्द कहे गए। परिवार सहित जान से मारने और नौकरी नहीं करने देने की धमकी दी गई। मोबाइल पर हुई इस बातचीत की रिकार्डिंग भी पुलिस को उपलब्ध कराई गई है।

शाखा प्रबंधक मलय मोहन के मुताबिक उन्होंने इस संबंध में गाजीपुर थाने और बाद में पुलिस आयुक्त को शिकायत की। पर, कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में अर्जी डाली। कोर्ट ने गाजीपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया। इंस्पेक्टर गाजीपुर राजेश मौर्य के मुताबिक कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

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